छोटे लम्हे, बड़ी सीख -2

छोटे लम्हे, बड़ी सीख -2

 डॉ रीटा अरोड़ा

 

1. अनपढ़ा संदेश

माँ लंबे मैसेज भेजती थी, बेटा सिर्फ “ok” लिखकर जवाब देता था। एक दिन मैसेज आना बंद हो गए।

सीख: एक शब्द के जवाब रिश्तों को छोटा कर देते हैं

  2. बिना साथ का त्योहार

घर सजा था, रोशनी थी-लेकिन हर कोई अलग कमरे में था।

सीख: त्योहार सजावट से नहीं, लोगों से बनते हैं।

3. सफलता लेकिन अकेलापन

एक आदमी ने सब कुछ हासिल किया-लेकिन घर पर उसके साथ बांटने वाला कोई नहीं था।

सीख: रिश्तों के बिना सफलता अधूरी है ।

4. देर से किया गया कॉल

आखिरकार उसने अपने माता-पिता को कॉल करने का समय निकाला-लेकिन अब नंबर पहुंच से बाहर था।

सीख: सही समय का इंतज़ार मत करो, कुछ कॉल आज ही करने चाहिए।

5. धीरे-धीरे दूर होना

कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ-बस बातें कम हो गईं, मुलाकातें कम हो गईं और अपनापन भी।

सीख: दूरी चुपचाप बढ़ती है।

6. साथ होकर भी अलग

पूरा परिवार एक ही कमरे में था-लेकिन हर कोई अपनी-अपनी स्क्रीन में खोया हुआ था।

सीख: पल साझा करो, सिर्फ जगह नहीं।

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