Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मंजुल भारद्वाज की कविता – ना जाने वो…

कविता ना जाने वो …  मंजुल भारद्वाज ना जाने वो कौन सी मिट्टी होती है जिसमें ज़िंदा क़ौम लहलहाती है…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं 1. फूलों के रॅंग सपनों में   फूलों के रॅंग सपनों में ज़रुरी तो नहीं…

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सेवा नगर’ : मानवीय त्रासदी के ज़ख्म और पीड़ा (भाग-2) : कथा समीक्षा (दूसरी किस्त)

साहित्य आलोचना के सरोकार ‘सेवा नगर’ : मानवीय त्रासदी के ज़ख्म और पीड़ा (भाग-2) : कथा समीक्षा (दूसरी किस्त) ओमसिंह…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – घर

कविता घर मंजुल भारद्वाज   घर मेरे अस्तित्व के सांसारिक पहलू का आयाम है सृजन की वैचारिक प्रतिबद्धता के अर्थ…

Blogआलेख विचारसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

सुप्त संवेदनाओं और सपनों को जगाने वाला उपन्यासः अल्केमिस्ट

विचार सुप्त संवेदनाओं और सपनों को जगाने वाला उपन्यासः अल्केमिस्ट उर्वशी उपन्यास ‘अल्केमिस्ट’ आधुनिक विश्व-साहित्य की उन विरल कृतियों में…

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‘सेवानगर’ : मानवीय त्रासदी के ज़ख्म और पीड़ा (भाग-1) : कथा समीक्षा

(प्रस्तुत लेख में भी हमने पाठकों की सुविधा का ध्यान रखा है। इसको दो किस्तों में प्रकाशित कर रहे हैं।…

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पाप और विज्ञान : नैतिकता का सच

पुस्तक समीक्षा पाप और विज्ञान : नैतिकता का सच नमिता जब समाज वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी, यौन रोग, गर्भपात, व्यभिचार, तलाक…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – तथ्य और सत्य

कविता तथ्य और सत्य मंजुल भारद्वाज तथ्य लोग धर्म में मुक्ति खोजते हैं सत्य धर्म मुक्ति नहीं गुलामी देता है!…

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वहाँ कविता संजीवनी बन जाती है: काव्य समीक्षा 

ब्रजेश कृष्ण के कविता संग्रह ‘जो राख होने से बचे हैं अभी’ पर टिप्पणी साहित्य आलोचना के सरोकार वहाँ कविता…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – अपने को मथती लेखनी

कविता अपने को मथती लेखनी मंजुल भारद्वाज   इंतज़ार कर रहा हूं घड़ियां गिन रहा हूं लिखते हुए सफ़र को…