जसवीर त्यागी की कविता – पानी के लाभ-नुकसान

कविता

पानी के लाभ-नुकसान

जसवीर त्यागी

एक मित्र ने लम्बे अरसे के बाद
अचानक घर बुलाया
बहुत आदर सत्कार किया

वह पानी मशीन की एक कम्पनी में कार्यरत है
‘जल ही जीवन है’ पर
घण्टा भर बोलता रहा अनवरत

पानी की खामियों और बीमारियों के बारे में
मुझे अवगत कराता रहा

फिर उसने अपनी कम्पनी की बनी
पानी की मशीन के फायदों के बारे में
मुझे विस्तार से समझाया

बीच-बीच में
वह अपने घर में लगी
पानी की मशीन का हवाला देता हुआ
बार-बार पानी परोसता रहा

मेरे पानी पीने के बाद
उसने हर बार पूछा-
क्यों हैं ना गंगोत्री का पानी?
मैं उसकी हाँ में हाँ मिलाता रहा

उसकी बातों से साफ जाहिर था
उसे पानी के अनेक लाभ-हानि पता हैं

उसने जिस अंदाज में
पानी की मशीन का गुणगान किया
उसे सुनकर लगा
कि जिसके पास वह मशीन नहीं
उसका जीवन कभी भी संकटों से घिर सकता है

अंत में मित्र ने उपसंहार में कहा-
तुम अगर संकटों से बचना चाहते हो
तो पानी की मशीन खरीद लो जल्द से जल्द
जितनी शीघ्रता से तुम मशीन खरीदोगे
उतनी ही तीव्रता से संकट दूर होंगे

अगर मेरी मार्फ़त खरीदोगे तो
मैं तुम्हें अपना भाई होने के नाते
ज्यादा से ज्यादा रियायत दिलवाऊंगा

उसने मुझे समझाया
खराब पानी से ही जन्म लेती हैं
सारी घातक बीमारियाँ

वह हर बार कुछ बताने से पहले
कम्पनी की मशीन का पानी पिलाता
और मुझे पानी पीते हुए बहुत गौर से निहारता

मैंने देखा
कि उसके पास पानी की बेशकीमती
मशीन होने के बावजूद भी
उसकी आँखों में पानी नहीं है।

लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में हिन्दी के प्रोफेसर हैं।