रमेश जोशी की कविता- बहुत जरूरी है…

कविता

बहुत ज़रूरी है…

रमेश जोशी

 

सुख के माथे दुक्ख दिठौना बहुत ज़रूरी है |

नए जनम की खातिर मरना बहुत ज़रूरी है |

 

सही शब्द को सही जगह पर रखना अच्छा है

पर कविता में खुद को बोना बहुत ज़रूरी है ||

 

यादों की पुस्तक में कोई सपनों का नक्शा

भूले से आगे आ जाना बहुत ज़रूरी है ||

 

हँसने से सेहत सुधरेगी मान लिया हमने

पर खुशियों की खातिर रोना बहुत ज़रूरी है ||

 

सारी चहल-पहल में भी हम खुद से बतियालें

घर में ऐसा कोना होना बहुत ज़रूरी है ||

 

ईश्वर-अल्ला में बारे में हम क्या कह सकते

पर बच्चों के लिए खिलौना बहुत ज़रूरी है ||

 

आँखें खोले शर-शय्या पर जीवन भर लेटे

सुख-सपनों हित पलक बिछौना बहुत ज़रूरी है ||

 

सच का मक्खन बाज़ारों में नहीं मिला करता

तन-हाँडी दुःख-दही बिलोना बहुत ज़रूरी है ||

 

हाथ पीठ पर राजा की धनपति का बुरा नहीं

पर शबरी के फल भी खाना बहुत ज़रूरी है ||

 

दीवानी मीरा विष-प्याला हँसकर पी लेगी

पर कान्हा का उस तक जाना बहुत ज़रूरी है ||

 

पूर्ण सादगी और स्वच्छता रख लेंगे साधो

रूखी हो पर रोटी होना बहुत ज़रूरी है ||

 

पढ़े-लिखों को गोपी का मन समझ नहीं आता

हर उद्धव का ब्रज हो आना बहुत ज़रूरी है ||

2014

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