Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसमय /समाज

मुनेश त्यागी की कविता – पितृ दिवस के मौके पर

हमारे पिता जी  पढ़े लिखे  नहीं थे। पिता जी के साथ हमारे तीन ताऊजी भी शामिल हैं। हमारे दो ताऊजी…

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ओमसिंह अशफ़ाक की कहानी : लोक-यमलोक

देश आजाद होने के बाद भी आर्थिक आजादी की लड़ाई चलती रही है। मेहनतकश तबके अपने शोषण- उत्पीड़न के खिलाफ…

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ओमसिंह अशफ़ाक की कहानी – लड़कियां और शोहदे

सांस्कृतिक रूप से पिछड़े, जातिवादी, सामंती, पुरुष-प्रधान समाज में स्त्री का संघर्ष कितना विकट और दुष्कर है, यह हम सब…

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सम्मान के साथ बुढ़ापा

कल विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस था। आज बुजुर्गों को लेकर एक कविता दिखी। बहुत मार्मिक कविता है। आप लोग…

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त्रिभुवन की कहानी – बाघ से बड़ा बिलाव

कहानी बाघ से बड़ा बिलाव त्रिभुवन यह राजस्थान की रेतीली सीमाओं से परे इस प्रदेश की उस कालखंड की कहानी…

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ओमसिंह अशफ़ाक की कहानी : आज का सच 

वरिष्ठ कहानीकार ओमसिंह अशफ़ाक की सभी कहानियों में समय का सच विद्यमान रहता है। यानी जिस कालखंड में कहानी रची…

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शंभुनाथ की कविता – हाथ

कविता हाथ शंभुनाथ   हाथ कंधे पर रखा मनुष्य का विश्वास है जब जुड़ते हैं प्रार्थना बन जाते हैं और…

Blogगीत ग़ज़लसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मुनेश त्यागी का गीत- मेहनतकशों एक हो जाओ बोला हिंदुस्तान रे

गीत मेहनतकशों एक हो जाओ बोला हिंदुस्तान रे मुनेश त्यागी   जननी रोये, पत्नी रोये, रोये सारा गांव रे, अमीर…

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ओमसिंह अशफ़ाक की कहानी पलायन

भारतीय समाज वैदिक काल से ही वर्ग-विभाजित समाज रहा है। यहां “आदर्शवाद और यथार्थ” में न केवल बड़ा फासला रहा…

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मोहन मुक्त की कविता- निगाह…

कविता निगाह… मोहन मुक्त   “मडू लेसा पचु हर…” बचपन के झगड़ों में मेरे साथ के बच्चे किसी बहस में…