जसवीर त्यागी की घर पर कुछ कविताएँ
(1)
जिनके घर थे
वे अपने घरों में सुरक्षित
सुकून की नींद सोते थे
जिनके नहीं थे
वे घर के सपनों संग
फुटपाथ पर सोते थे
और दूसरों के लिए
घर बनाते थे।
(2)
एक ऐसा घर हो
जिसमें
बच्चें और बुज़ुर्ग हों
आँगन में कोई पेड़
और साथ में
कोई पालतू हो
सामान न ज्यादा
आलतू-फालतू हो।
(3)
यात्रा में
घर याद आता है
घर में
याद आती है यात्रा।
(4)
जब हम
यात्रा पर होते हैं
हमारा घर भी
यात्रा करता है
हमारे साथ-साथ।
(5)
वे घर
बहुत सुंदर लगते हैं
जहाँ सामान कम
सम्मान अधिक मिलता है।
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