राजेश भारती की एक कविता – संसद भवन की कैन्टीन

संसद भवन की कैन्टीन में
बैठे हुए
एक नेता ने कहा:
देश खतरे में है

दूसरे ने जवाब दिया:
नहीं, मेरी सीट खतरे में है
और फिर दोनों ने अपने अपने हिस्से का बिस्कुट
चाय में डुबाया और खा लिया
जैसे समस्या का हल मिल गया।

 

राजेश भारती

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