जनपक्षीय सामाजिक परिवर्तन के लिए वैज्ञानिक विचारधारा की अहम भूमिका – डॉ. मुक्ता दाभोलकर
-
डॉ नरेंद्र दाभोलकर के शहीदी दिवस पर तर्कशील सोसायटी का बरनाला में तीन दिवसीय पुस्तक मेले का शानदार आगाज
बरनाला। तर्कशील सोसाइटी पंजाब द्वारा प्रसिद्ध तर्कशील चिंतक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की याद को समर्पित तीन दिवसीय पुस्तक मेले का उद्घाटन स्थानीय तर्कशील भवन में ऑस्ट्रेलिया से विशेष रूप से पहुंचे तर्कशील चिंतक मनजीत बोपाराय द्वारा किया गया। इस पुस्तक मेले में पंजाब के नामचीन प्रकाशकों द्वारा तर्कशील, इंकलाबी (क्रांतिकारी), मानवतावादी और प्रगतिशील साहित्य के स्टॉल लगाए गए हैं, जिसे पहले ही दिन पाठकों का बहुत शानदार प्रोत्साहन मिला।

इस अवसर पर पहले सत्र में ऑनलाइन संबोधित करते हुए डॉ. मुक्ता दाभोलकर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था की आड़ में अंधविश्वासों, पाखंडवाद और रूढ़िवादिता के खिलाफ जनपक्षीय सामाजिक परिवर्तन के लिए आम लोगों में वैज्ञानिक विचारधारा का बड़े पैमाने पर प्रसार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने महाराष्ट्र में ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ की स्थापना करके अंधविश्वासों, जाति-पाति, नशे और मूर्ति विसर्जन के खिलाफ बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों द्वारा वैज्ञानिक विचारधारा पर किए जा रहे हमलों और चुनौतियों का मुकाबला लोकतांत्रिक और तर्कशील संस्थाओं द्वारा एकजुट होकर ही किया जा सकता है। इस दौरान तर्कशील मैगजीन के संपादक राजपाल सिंह ने मंच संचालन किया और डॉ. मुक्ता से श्रोताओं के सवालों के जवाब दिलवाए।
इससे पहले प्रांतीय संगठनात्मक प्रमुख मास्टर राजेंद्र भदौड़ ने आए हुए अतिथियों, विद्यार्थियों और प्रकाशकों का स्वागत किया तथा पंजाब में तर्कशील लहर को और मजबूत करने के लिए गांव स्तर पर ऐसे पुस्तक मेले आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अगले सत्र में प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञों और “साडा (अपना)डॉक्टर” ग्रुप के एडमिन डॉ. अमृतपाल सिंह, डॉ. जगरूप सिंह, डॉ. जशनप्रीत सिंह और डॉ. समरीन द्वारा ‘आम बीमारियों से जुड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक सच’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए पुराने टोने-टोटकों और धागे-ताबीजों जैसे मिथकों के प्रति जागरूक करके लोगों में वैज्ञानिक चेतना विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि साम्राज्यवादी सरकारों और दवा माफिया की मिलीभगत से इलाज के नाम पर लोगों की लूट की जा रही है। इस मौके पर उन्होंने श्रोताओं के बीमारियों से जुड़े कई सवालों के संतोषजनक जवाब भी दिए। उनकी टीम में डॉ. मनदीप बातिश, डॉ. संदीप सिंह और डॉ. संजय भाटिया भी मौजूद थे।
इस अवसर पर विद्यार्थियों की सुंदर लिखावट (सुलेख) प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं और नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। तर्कशील सोसाइटी की राज्य कमेटी द्वारा विजेता विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार और तर्कशील पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा राज्य कमेटी के नेता हेम राज स्टेनो, गुरप्रीत शहणा, कुलजीत फाजिल्का, राम स्वर्ण लखेवाली, सुखविंदर बागपुर, राजेश अकलीया, सुमीत अमृतसर, मोहन बडला, जोगिंदर कुल्लेवाल, जसविंदर फगवाड़ा, जुझार लोंगोवाल, दीप दिलबर, अमित मित्र, वरिंदर दिवाना, परम वेद संगरूर, पत्रकार पुरुषोत्तम बल्ली, बलराज मोड़, सुखदेव फगवाड़ा, डॉ. राजेंद्र, पाल बागपुर, राम कुमार पटियाला, तेजिंदर सिंह, बिंदर धनौला, जसवीर सोनी, कुलदीप नैणेवाल, रणधीर गिलपती, ज्ञान सिंह बठिंडा, अजायब जलालआणा, जिंदर बागपुर, चन्नण वांदर, भूरा सिंह महिमासरजा, इकबाल कौर उदासी, विश्व कांत, बलबीर लोंगोवाल, कुलवंत सिंह, परमजीत जोधपुर, चरणजीत कौर आदि उपस्थित थे।
सुमीत अमृतसर, तर्कशील सोसाइटी पंजाब के प्रांतीय मीडिया प्रमुख की रिपोर्ट
