रणबीर सिंह दहिया की रागनी – दारूबाज
मेरे पिया नै दारु सट्टे मैं चारों किल्ले लिए जिता।।
सारा कुनबा देवै दुहाई छोरे नै दिए घणे सता।।
1
शुरू में लाग्या पीवण देखा देखी अपने यारां की
सहज सहज बाण पड़ी शर्म नहीं परिवारां की
संगत ले ली बदकारां की गाम नै चल्या पता ।।
साराकुनबा देवै दुहाई छोरे नै दिए घणे सता ।।
2
सरकार ठेके बंद करो म्हारे पै होवैगा अहसान
मनै मरना दीखै से मेरे गैल मरैंगी दो सन्तान नेता हुए क्यों अनजान उनका हुया भ्रष्ट मता ।।
सारा कुन्बा देवै दुहाई छोरे नै दिए घणे सता।।
3
पीछा छुड़वाना चाहवै सै या ना पीछा छोड़ रही
घर कोये बच्या नहीं ना कोए माणस की खोड़ रही
नहीं दुख़ां की औड़ रही टोहूँ कौन सा राह बता।।
सारा कुनबा देवै दुहाई छोरे नै दिए घणे सता।।
4
रणबीर यो दारू आला ना जिया ना मरया करै
सारा कुनबा संकट मैं दारू आले का घिरया करै
यो घर घर डरया करै दारू बलावै रोज चिता ।।
सारा कुनबा देवै दुहाई छोरे नै दिए घणे सता।।
