नरसिंह कुमार ‘मयूर’ की कविता- मुक्ति की सच्ची राह

कविता

 

मुक्ति की सच्ची राह

 

नरसिंह कुमार ‘मयूर’

 

मुक्ति और मोक्ष की खोज में,

हम जीवन भर भटकते रहे,

धार्मिक भ्रम और षड़यंत्रों की,

ऊंची दीवारों से अटकते रहे।

 

जिस मोक्ष की चिंता में हमने,

जीवन का हर सच वार दिया,

उस पाखंड की बलिवेदी पर,

चेतना का हर रूप मार दिया।

 

आखिर क्या है मुक्त जीवन,

क्या यह केवल एक विचार है?

विचार ही तो इस दुनिया में,

हर विवाद का आधार है।

 

विचारों ने ही स्वार्थ बुना,

और परमार्थ को संवारा है,

भेदभाव की गहरी जड़ों को,

विचारों ने ही ललकारा है।

 

यदि पाखंडी व्यवस्थाओं ने,

समाज को टुकड़ों में बांटा,

तो क्रांतिकारी विचारों ने ही,

बोया समता का एक कांटा।

 

पर अभी बहुत कुछ बाकी है,

सोए समाज को जगाने में,

सच्चाई का दीपक लेकर,

हर एक मन तक जाने में।

 

सब मानव हों एक समान,

सबको मिले बराबर सम्मान,

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार मिले,

और जागे सबका स्वाभिमान।

 

मानवतावादी दृष्टिकोण ही,

सच्चा मानववाद सिखाएगा,

जब नीतियों का अधिकार-पत्र,

जन-जन के हाथों में आएगा।

 

संविधान की छांव तले जब,

शोषण का अंत करेंगे हम,

पाखंड और षड़यंत्रों के,

हर जाल को नष्ट करेंगे हम।

 

यही है, मानवता का सच्चा मोक्ष,

यही मुक्ति का है महान आधार,

जहाँ हर इंसान को मिल सके’मयूर’

समता, अधिकार और सम्मान का संसार।

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