आवारा कुत्तों का आतंक…

लेखक – गुरमीत अंबाला

आवारा कुत्तों का आतंक…

गुरमीत अंबाला

आजकल पूरे भारत में कुत्तों का आतंक जोरों से फैल रहा है ऐसी बहुत सी घटनाएं देखने पर मिल रही ,जहां जरा सी लापरवाही जानलेवा होती है।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले 22 वर्षीय स्टेट लेवल कबड्डी खिलाड़ी बृजेश सोलंकी की रैबीज (Rabies) से दर्दनाक मौत हो गई थी।

बृजेश सोलंकी

बृजेश ने एक नाले में फंसे कुत्ते के छोटे पिल्ले को बचाकर बाहर निकाला था, जिस दौरान पिल्ले ने उन्हें खरोंच मार दी थी। इसे मामूली चोट समझकर उन्होंने एंटी-रैबीज वैक्सीन (Anti-Rabies Vaccine) नहीं लगवाई। ​कुछ हफ़्तों बाद उनमें रैबीज हुई और एक होनहार खिलाड़ी की जान चली गई।

 

पराग देसाई

एक और घटना में बाघ बकरी टी ग्रुप (Wagh Bakri Tea Group) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देसाई 15 अक्टूबर 2023 को अपने घर के पास टहल रहे थे, तभी आवारा कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। कुत्तों से खुद को बचाने की कोशिश में वे गिर पड़े और उनके सिर में गंभीर चोट आ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान ब्रेन हैमरेज की वजह से 22 अक्टूबर 2023 को 49 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
एक दुखद घटना में भारतीय सशस्त्र बलों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मौत बाइक से जाते समय अचानक सामने आए आवारा कुत्तों के टकराने से हुई थी।
2023 में एक और चर्चित मामले में गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के 14 वर्षीय शाहवेज़ को कुत्ते ने काट लिया था। डर के मारे बच्चे ने अपने माता-पिता को नहीं बताया। डेढ़ महीने बाद जब रैबीज हो जाने पर बच्चा तड़प-तड़पकर मर गया। इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में आवारा कुत्तों को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग उठी थी।
जरूरी नहीं कि कुत्तों के काटने से रैबीज होने के कारण ही मृत्यु होती है
भारत में कुत्तों की अधिकता के कारण अचानक टू व्हीलर से टकराने या सैर करते बुजुर्ग, बच्चों पर अचानक कुत्तों के हमले होने से गंभीर चोटें आ जाती हैं कई बार सिर में चोट लगने मृत्यु तक हो जाती है ।
यद्यपि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कुत्तों के विषय को लेकर चले लंबे केस में सख्त फैसले दिए हैं,लेकिन धरातल पर वे अभी तक भी व्यवहारिक रूप से लागू नहीं हुए हैं, जब तक इस विषय भी जारी गाइड लाइन का पालन नहीं होता लोग कुत्तों के अचनक हमले होने से गंभीर चोटें लगने से या रैबीज के कारण मौत के मुंह में जाते रहेंगे ।

लेखक गुरमीत अंबालवी तर्कशील पत्रिका के संपादक हैं।

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