दिनेश बंसल की ग़ज़ल

दिनेश बंसल की ग़ज़ल­

कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है
सिर्फ़ कहने को हक़-बयानी है

नाव साहिल पे आ के डूब गई
नाख़ुदाओं की मेहरबानी है

जो दिये ओट में थे वे ही बुझे
ये हवाओं की पासबानी है

ज़र्द पत्तों ने मुस्कुरा के कहा
फ़स्ल-ए-गुल है हवा सुहानी है

शाम की चाय उनके साथ पिऊँ
दिल की हसरत बहुत पुरानी है

 

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