HomeBlogराजेश भारती की कविता – काॅकरोच राजेश भारती की कविता – काॅकरोच 22 May 202622 May 2026Pratibimb Samachar राजेश भारती की कविता – काॅकरोच मेरी पत्नी चीख़ी मैंने कहा डरो मत ये तो बस हमारी व्यवस्था का प्रतीक है। जो गंदगी में भी खुशहाल रहता है। Post Views: 137 Like 0 0 Comments
कविता में ‘रूपक और सोशल-मेलोड्रामा ‘ कविता में ‘रूपक और सोशल-मेलोड्रामा ‘ प्रस्तुत कविता बहुजन न्यायवादी कवि ओमसिंह अशफ़ाक की पुस्तक ‘अन्याय गाथा’ के खंड आठ…
त्रिभुवन की कहानी – नया ग़ज़नी और सोने का मंदिर लोककथा नया ग़ज़नी और सोने का मंदिर त्रिभुवन बहुत पुरानी बा,त है। इतनी पुरानी कि उस समय इतिहास किताबों में…
डोनाल्ड ट्रम्प की दंडात्मक धमकी के बाद, भारतीय सरकारी रिफाइनरियों ने ‘रूसी तेल खरीद रोकी’ डोनाल्ड ट्रम्प की दंडात्मक धमकी के बाद, भारतीय सरकारी रिफाइनरियों ने ‘रूसी तेल खरीद रोकी’ डोनाल्ड ट्रम्प की दंडात्मक…