जसवीर त्यागी की दो कविताएं

जसवीर त्यागी की दो कविताएं

प्यार

शाम को
मुझे घर आता देख

दूर से ही
मेरी तरफ दौड़ती हुई आयी
पाँच साल की बिटिया

चढ़ गयी मेरी गोद में
और चूमने लगी मेरा मुँह

मैंने टोकते हुए कहा-
बाहर से आया हूँ
कपड़े गंदे होंगे
दूर रहो अभी कुछ देर

बिटिया दूसरे गाल पर
प्यार करते हुए बोली-
पापा कभी गंदे नहीं होते।

माँ और घर

अपनी बनावट में
जितने छोटे,सरल
और कोमल शब्द हैं-
माँ और घर

अपनी अर्थवत्ता और सार्थकता में
उतने ही व्यापक,तरल और सबल हैं

कभी-कभी
मुझे माँ घर लगती हैं
और घर माँ लगता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *