जसवीर त्यागी की बेटी केंद्रित दस कविताएँ
समुद्र
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बीमार बेटी
जिद करती है
समुद्र देखने की
मैंने कहा-
पहले ठीक हो जाओ
उसके बाद
लेकिन नहीं
उसने खाना बंद कर दिया
मैंने कुछ किताबें दिखाईं
उसने दवाई की शीशी तोड़ दी
फ़िल्म दिखाना चाहा तो
बोलना छोड़ दिया
हार कर मैंने कहा
बेटी झाँक मेरी आँखों में
और देख
हर किसी की आँख में
एक नदी बहती है
सीने में
समुद्र लहराता है
बस फर्क इतना है
कोई देख लेता है
कोई देख नहीं पाता है।
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एथिक्स
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एक संस्थान ने
मुझसे शैक्षिक बायोडाटा
और साथ में एक फोटो की माँग की
मैंने तैयार कर
बिटिया को ईमेल करने को कहा-
मैंने एक फोटो न भेजकर
चार फोटो भेजना चाहा
जो पसंद होगी
उसका चयन संस्थान वाले कर लेंगे
बिटिया ने कहा-
एक फोटो न भेजकर चार भेजना
एथिक्स के खिलाफ है
जब आप स्वयं
अपनी फोटो का चयन करने में असमर्थ हैं
तो कोई दूसरा कैसे चयन कर सकेगा?
अपना काम और जिम्मेदारी
दूसरे पर डालना
सामने वाले के लिए सुविधा नहीं दुविधा है।
प्यार
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शाम को
मुझे घर आता देख
दूर से मेरी तरफ दौड़ती हुई आयी
पाँच साल की बिटिया
चढ़ गयी मेरी गोद में
और चूमने लगी मेरा मुँह
मैंने टोकते हुए कहा-
बाहर से आया हूँ
कपड़े गंदे हैं
अभी दूर रहो कुछ देर
बिटिया दूसरे गाल पर
प्यार करते हुए बोली-
पापा कभी गंदे नहीं होते।
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जरूरत
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स्कूल से घर लौटते हुए
बेटी ने कहा –
पापा,किसी बूढ़े आदमी के रिक्शा में ही बैठना
मैंने पूछा-क्यों?
वह बोली-
हर किसी को जल्दी है
मंजिल पर पहुँचने की
जवान के रिक्शे पर बैठते हैं ज्यादातर लोग
बूढ़े रिक्शा धीरे खींचते हैं
कम मिलती है सवारी
उन्हें भी पैसों की जरूरत होती होगी
तभी चलाते हैं रिक्शा
वरना किसे अच्छा लगता है
आराम करने की उम्र में काम करना।
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स्नेह का संगीत
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अपने काम पर जाते हुए
मैं घर के सदस्यों से कहता हूँ-
जा रहा हूँ
अपने-अपने तरीके से
सब उत्तर देते हैं बारी-बारी
बेटी बोलती है-
जल्दी आना पापा
बेटी के बोल
स्मृतियों के साज पर
सरगम-से बजते हैं
स्नेह का संगीत
मेरी मनुष्यता को बचाये रखता है।
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पुष्प की ताकत
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विश्वविद्यालय में फ्लॉवर शो था
बिटिया अपनी पसंद से
रजनीगन्धा की
एक कलम घर ले आयी
लाकर सजा दी फूलदान में
कुछ ही पलों में
सारा घर सुवासित गंध से भर गया
मन बार-बार
पुष्प की ओर ही बंधा चला जाये
निःशब्द रहकर भी
अपनी उपस्थिति से
जीत सकते हैं दूसरों का दिल
यह मैंने एक पुष्प से सीखा।
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डाँट
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किसी को भी
किसी की डाँट
अच्छी नहीं लगती
किसी का डाँटना
कभी लाठी की तरह
तो कभी तीर की तरह चुभता है
यहाँ तक की
कभी-कभी तो
वह गोली की तरह घायल करता है
दुनिया में
बेटी वो संबंध है
जिसकी डाँट खाकर
आदमी ख़ुशी महसूस करता है।
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संगीत
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बेटी कुछ खाने से पूर्व
मेरी ओर बढाते हुए कहती है-खाकर देखिए
उनमें से बहुत सारी चीजें
बच्चों के खाने वाली होती हैं
जिन्हें मैं कम
वह ज्यादा पसंद करती है
उसके कहने को
मैं सहजता से स्वीकार करता हूँ
जैसे हाथ प्रार्थनाएं और दुआएँ स्वीकार करते हैं
मुझे खाता देखकर
बिटिया के स्वरों में शहनाई-सी बजती है
पिता-पुत्री के स्नेह का संगीत
संवेदनाओं के संग्रहालय में
देर तक गूँजता रहता है।
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चेक बुक
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स्कूल की फीस का चेक बनाते हुए
मुझे देख
बिटिया ने
कुछ छोटे-छोटे कागज़ जोड़कर बनायी
अपनी एक अलग अनूठी नयी चेक बुक
बोली-पापा बताइये
आपको कितने का चेक दूँ?
यह पूछते हुए
उसका अंदाज़े-बयाँ
बहुत ठाट-बाट भरा था
मुझे बहुत भाया
मानो वह छोटी बच्ची नहीं
वर्ल्ड बैंक की कोई प्रसिडेंट हो।
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पायदान पर चप्पलें
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पायदान पर
ढाई साल की बिटिया की
नन्हीं-नन्हीं रंग-बिरंगी चप्पलें रखी हैं
देखने वालों को
पायदान पर चप्पलें दिखाई देती हैं
एक पिता की निगाहों से देखिए
आपको कविता दिखाई देगी।
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जीवन के प्रति गहरी आस्था, सादगी और सूक्ष्म अनुभूतियों का सजीव चित्रण है।
आपकी कविताएं बहुत परिपक्व और परिमार्जित हैं। बहुत ही सुन्दर कविताएं हैं। हमें भी सीखने को मिलता है।
कवि ने बड़ी मासूमियत से पिता और बेटी के बीच सहज नेह संबंध का चित्रण किया है।
अत्यंत ही विस्मरणीय ❤️❤️
आदरणीय सर, सादर प्रणाम!
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आपकी इन सुंदर कविताओं के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। आपकी लेखनी इसी तरह प्रेम, संवेदना और मनुष्यता से हिंदी साहित्य को समृद्ध करती रहे। सादर नमन!
स्नेह और आत्मीयता से परिपूर्ण सुंदर व सहज कविताएं !
अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण कविताएँ बधाई हो
अत्यंत भावपूर्ण तथा ह्रदयस्पर्शी ।
आप का हर शब्द ह्रदय की गहराई में उत्तर जाता हैं स्नेह और आत्मीयता से परिपूर्ण सुंदर व सहज कविताएं !