मंजुल भारद्वाज की कविता – अच्छे साहित्यकार

कविता

अच्छे साहित्यकार

 मंजुल भारद्वाज

 

है ना कमाल

देश में मौत का तांडव है

हर घर मसान है

साहित्य में अवसान है !

 

पलायन युक्ति ही शक्ति है

अच्छे साहित्यकार

राजनीति से दूर रहते हैं

सीधे सीधे नहीं लिखते

अलंकृत भाषा में लिखते हैं !

 

चंद इतिहास में खो जाते हैं

सदियों के लिहाफ़ में सो जाते हैं

मौत दरवाज़ा खटखटाती है

यह पद्म सम्मान दिखाते हैं!

 

अच्छे साहित्यकार किसी का

मन आहत नहीं करते

छवि मलिन ना हो जाए

इसलिए जनसंहार करने वाले को

हत्यारा नहीं कहते !

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