HomeBlogराजेश भारती की कविता – पेट राजेश भारती की कविता – पेट 25 May 202625 May 2026Pratibimb Samachar राजेश भारती की कविता – पेट पेट के लिए खेत जोता पेट के लिए मजदूरी की पेट के लिए गाली खाई पेट के लिए अंगूठा लगाया पेट के लिए गाय बेची पेट के लिए मैला ढोया पेट के लिए जूते गांठें जब पेट भर गया तो उन्होंने कहा पेट भरते ही अकड़ आ गई। राजेश भारती Post Views: 12
मनजीत भावड़िया की हरियाणवी और हिंदी कविताएं ना रह्या (1) ना रह्या वो कुणबा काणबा ना रह्या वो मेल – जोल ना रह्या वो हस्सी ठठ्ठे…
आज का समय और कविता की ताकत-2 कुछ निजी प्रसंग-2 आज का समय और कविता की ताकत-2 ओमसिंह अशफ़ाक यह, दूसरी घटना सन् 2006 की है।…
उमर खालिद, शरजील इमाम आदि के जमानत के विरोध में सरकार का तर्क- ‘वे बुद्धिजीवी होने का दिखावा करके देशद्रोही हैं’ फोटो द टेलीग्राफ से साभार उमर खालिद, शरजील इमाम आदि के जमानत के विरोध में सरकार का तर्क- ‘वे बुद्धिजीवी…