HomeBlogराजेश भारती की कविता – पेट राजेश भारती की कविता – पेट 25 May 202625 May 2026Pratibimb Samachar कविता पेट राजेश भारती पेट के लिए खेत जोता पेट के लिए मजदूरी की पेट के लिए गाली खाई पेट के लिए अंगूठा लगाया पेट के लिए गाय बेची पेट के लिए मैला ढोया पेट के लिए जूते गांठें जब पेट भर गया तो उन्होंने कहा पेट भरते ही अकड़ आ गई। Post Views: 82 Like 0 0 Comments
भ्रष्टाचार के मामलों में 78 प्रतिशत बढ़ोतरी, हरियाणा की प्रभावित हो रही है छवि: कुमारी सैलजा भ्रष्टाचार के मामलों में 78 प्रतिशत बढ़ोतरी, हरियाणा की प्रभावित हो रही है छवि: कुमारी सैलजा कहा-भ्रष्टाचार पर रोक लगाने…
जयपाल की कविता ‘एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया’ का एक दार्शनिक, भाषिक और वैचारिक विवेचन प्रतिबिम्ब मीडिया में 7 अगस्त 2025 को वरिष्ठ कवि चिंतक जयपाल की ‘एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया’ शीर्षक…
अब जब बटन दबाकर अनुवाद हो सकता है अब जब बटन दबाकर अनुवाद हो सकता है संजय कुमार सिंह जनसत्ता में नौकरी के नाम पर मैं जो पत्रकारिता…