मुनेश त्यागी की कविता – भारत के हम लोगों पर

कविता

“भारत के हम लोगों” पर

मुनेश त्यागी

,
पूंजीपति
सामंती
सरकार
पुलिस।

धर्मांध
अज्ञानी
मक्कार,
अंधविश्वासी।

भ्रष्टाचार
अनाचार
अत्याचार
अनाधिकार।

गरीबी
महंगाई
बेरोजगारी
रिश्वतखोरी।

वर्णवादी
क्षेत्रवादी
जातिवादी
फासीवादी
साम्प्रदायिक।

जबर्दस्ती
लदे हुए हैं
सब के सब
“भारत के हम लोगों” पर

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