जसवीर त्यागी की लड़ाका और अन्य कविताएं
लड़ाका
जो हर लड़ाई में निपुण है
वह वक़्त-बेवक़्त
परिणाम को अपने पक्ष में
कर ही लेता है
और विजेता कहलाता है
फिर घमंड के घोड़े पर सवार होकर
बेकसूर मासूमों को कुचलता है
जो लड़ नहीं पाता
वह लड़ाई की रणनीति पर नहीं
लड़ाई के कारणों पर विचार करता है।
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प्यार
आप बेहतरीन कवि हैं-
उसने कहा
मैं कवि हूँ
मुझे पता था
उसने बेहतरीन कहा
तो खुद पर प्यार आया।
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प्रेम की हँसी
कई दिनों से
वह बुखार में है
उसके हाल-चाल पूछता हूँ
वह कहती है-
बाकी सब तो ठीक है
कमज़ोरी बहुत है अभी
सुनकर कुछ देर
हम दोनों मौन रहते हैं
भावनाएँ परस्पर संवाद करती हैं
मैं बोलता हूँ
कमज़ोरी चली जाएगी
अपना ध्यान रखिए
वह मुस्कुराती हुई कहती है
मैं तो बीमार हूँ
अपना ध्यान कैसे रखूँ?
तुम हो तो
मेरा ध्यान रखने के लिए
सुनकर हम दोनों एक साथ हँसते हैं
प्रेम की हँसी
कमज़ोरी दूर करती है।
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मौन
जिसे
शब्द नहीं कह पाते
उसे
मौन कहता है।
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यह जीवन
जीवन वह नहीं
जो हम सिर्फ अपने लिए जीते हैं
जीवन वह है
जो दूसरों के लिए जीया जाता है
जैसे कोई पेड़
कोई नदी
यहाँ तक कि
आसमान में चाँद,सूरज और तारे
वे भी दूसरों के लिए जीते हैं
हम जब दूसरों को
प्रेम और प्रेरणा नहीं दे पाते
नहीं बन पाते
किसी के होठों की हँसी
और न ही कोई सपना बन
किसी की आँखों को सजा पाते हैं
तब यह जीवन
सजा लगने लगता है।
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जोड़
बहुत सारे संस्कार
मुझे माँ ने सिखाए
ढ़ेर सारी सिखावन
मुझे ताई,चाची
बुआ,मौसी ने समझायी
अनेक बातें
मुझे बहन,बेटी
और दूसरी स्त्रियों ने बतायी
मुझ में
मेरा अपना कितना थोड़ा है
अधिकांश दूसरों ने ही
मुझ में कुछ-न-कुछ जोड़ा है।
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