मजदूरों के शोषण व दमन के खिलाफ अंबाला में सीटू की रैली, प्रदर्शन
-
डीसी दफ्तर पर प्रदर्शन में शामिल रहे आशा, मिड डे मील, ग्रामीण चौकीदार समेत कई संगठनों के सदस्य
अम्बाला शहर। सेन्टर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) से जुड़े सैकड़ों श्रमिकों ने सीटू नेता कविता शर्मा व रमेश नन्हेंड़ा के नेतृत्व में भाजपा की प्रदेश सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ शिक्षा सदन से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। श्रमिक मानेसर में गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई व सरकार द्वारा बनाई त्रिपक्षीय कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक 23196 रुपये न्यूनतम वेतन देने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन में आशा व मिड डे मील वर्कर्स, ग्रामीण चौकीदार व शहरी सफाई कर्मियों के साथ सर्व कर्मचारी संघ व रिटायर कर्मचारी संघ के सदस्यों ने भाग लिया।

उपायुक्त कार्यलय पर प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए सीटू राज्य सचिव सतीश सेठी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने न्यूनतम वेतन पर मजदूरों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। उन्होंने सिलसिलेवार बतया कि पिछला न्यूनतम वेतन 2015 में रिवाइज हुआ था। नियम मुताबिक यह हर पांच साल बाद रिवाइज करना चाहिए। परन्तु सरकार 2016 से 2025 (दस साल) तक चुप्पी साधकर बैठी रही। इस कारण मजदूरों के श्रम की जमकर लूट हुई।

सीटू के लगातार विरोध के चलते 2025 में सरकार ने वेतन रिवीजन के लिए सभी पक्षों की कमेटी का गठन किया। जिसमें फैक्ट्री मालिकों की एसोसिएशन, सरकार व श्रम विभाग के अधिकारी एवं सीटू समेत मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। सीटू ने वेतन निर्धारण के तय मापदंडों के मुताबिक महंगाई के अनुरूप 30 हज़ार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग कमेटी में रखी थी। इस त्रिपक्षीय कमेटी की कुल 9 मीटिंग हुईं।
29 दिसंबर 2025 को हुई अंतिम बैठक में सभी पक्षों की 23196 रू न्यूनतम वेतन पर सहमति बनी। इसका प्रस्ताव कमेटी ने सरकार को भेजा। परन्तु नायब सरकार ने सिफारिश की अनदेखी करते हुए एकतरफा 15220 रुपये का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। ऊपर से फैक्ट्री मालिक सरेआम इस नए वेतन को भी लागू करने में आनाकानी करने लगे। इस कारण मानेसर सहित फ़रीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल व पानीपत इत्यादि कई जगहों पर ओधोगिक मजदूरों के प्रदर्शन आज भी जारी है। यही नहीं हरियाणा के साथ लगते भाजपा शासित राज्य उत्तरप्रदेश में भी मजदूरों के जबरदस्त शोषण के चलते फैक्ट्रियों में हड़ताल चली हुई है।
सीटू नेता सर्वजीत कौर, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान इंद्र सिंह बधाना व रिटायर कर्मचारी संघ से कुलदीप चौहान ने कहा कि मजदूरों की आवाज सुनने की बजाए हरियाणा व उत्तरप्रदेश की सरकार दमन पर उतर आई है। मानेसर में 55 व नॉएडा में 400 मजदूरों को संगीन धाराएं लगाकर गिरफ्तार किया गया है। यह धर पकड़ लगातार जारी है। यहां तक कि मजदूरों की आवाज बुलंद करने पर सीटू समेत अन्य ट्रेड यूनियन नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा सीटू हरियाणा के पदाधिकारियों को भी नोटिस जारी किए है। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों से सीटू डरने वाली नहीं है। सरकार की तानाशाही का मुँहतोड़ ज्वाब दिया जाएगा।
मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की प्रधान ललिता खन्ना व नगरपालिका कर्मचारी संघ प्रधान शंकर लाल पामा, ग्रामीण चौकीदार सभा के प्रधान बाबू राम ने मांग की कि न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी का लाभ ओधोगिक क्षेत्र के मजदूरों, सभी सरकारी व निजी संस्थाओ के कर्मियों व परियोजना वर्कर्स को समान रूप से दिया जाए। इसके साथ ही निश्चित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करना दंडनीय अपराध बनाने। इसके अलावा 8 घंटे की ड्यूटी व ओवर टाइम का डबल वेतन दिया जाए। ठेका प्रथा व आउटसोर्सिंग बंद कर सभी मजदूरों, कच्चे कर्मचारियों व परियोजना वर्कर्स की सेवाएं नियमित करने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने फ़रीदाबाद हादसे में शहीद हुए फायर कर्मियों के आश्रितो को एक एक करोड़ तथा उसी फैक्ट्री में काम करते हुए मारे गए मजदूरों को 50 -50 लाख रुपये व एक सदस्य को नौकरी देने की भी मांग का प्रस्ताव पास किया और फायर कर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया।
इसके अलावा ग्रामीण चौकीदार सभा से मनीष कुमार, भवन निर्माण से शीतल, एसकेएस से विकास वर्मा, मैकेनिकल वर्कर्स यूनियन से देव राज, रोडवेज वर्कर्स यूनियन से रमेश श्योकंद व सर्वजीत सिंह, किसान सभा से का. टेक चंद व जनवादी लेखक संघ हरियाणा से जयपाल ने भी सम्बोधित किया।
रिपोर्ट-सतीश सेठी
