Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

डॉ. रीटा अरोड़ा की कविता- टीस के निशान

कविता टीस के निशान डॉ. रीटा अरोड़ा जो उम्रभर चुप्पी में पलते रहे ज़ख्म शब्दों के नहीं, उस सोच के…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

जसवीर त्यागी की दो कविताएं

जसवीर त्यागी की दो कविताएं क्षमा जो प्रेम करते हैं गलती होने पर क्षमा मांग लेते हैं इस तरह प्रेम…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता – चलना ही होगा तुम्हें..!

कविता चलना ही होगा तुम्हें..! ओमसिंह अशफ़ाक चलना ही होगा तुम्हें बेशक कठिन है तुम्हारी ये डगर। वहां घात लगाए…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

रणबीर सिंह दहिया की कविता- मेरी सोच

कविता मेरी सोच रणबीर सिंह दहिया स्कूल से आगे बढ़कर फिर कॉलेज जाना होगा इसके सपने बहोत बार देखे थे…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

हरदीप सबरवाल की कविता – रैस्टरूम में स्टूडेंट्स

कविता रैस्टरूम में स्टूडेंट्स हरदीप सबरवाल पहले पीरियड में ही बुझे चेहरे के साथ, लाचार हो पहुंच जाते, हाजिरी लेते…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ओमसिंह अशफ़ाक की कविता- मुल्क की गेल मखौल ना कर !

कविता मुल्क की गेल मखौल ना कर ! ओमसिंह अशफ़ाक दिके दिन-धौली़ तू रौल़ ना कर ! म्हारे मुल्क की…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

जसवीर त्यागी की कविताएं- प्रेम करो और उतनी जगह देना मुझे

जसवीर त्यागी की कविताएं- प्रेम करो और उतनी जगह देना मुझे प्रेम करो प्रेम करो अपनी आँखों से जिनसे देखना…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

डॉ रीटा अरोड़ा की कविता- मैं पैसा हूं…

कविता मैं पैसा हूँ… डॉ रीटा अरोड़ा मैं पैसा हूँ… मेरी कीमत तो लिखी हुई है, लेकिन तुम्हारी अभी लिखी…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

जसवीर त्यागी की कविता – पानी के लाभ-नुकसान

कविता पानी के लाभ-नुकसान जसवीर त्यागी एक मित्र ने लम्बे अरसे के बाद अचानक घर बुलाया बहुत आदर सत्कार किया…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

हरदीप सबरवाल की दो कविताएं

हरदीप सबरवाल की दो कविताएं 1 पंखे पर लटकी रोटी स्कूल जाते वक़्त मां बच्चे के टिफिन में रख देती…