रणबीर सिंह दहिया की गरीबी पर एक रागनी

आमतौर पर बढ़ती जनसंख्या को गरीबी के मुख्य कारण के रूप में देखा जाता है मगर यह सोच ठीक नहीं है। जनसंख्या तो चीन की भारत से ज्यादा है। एक रागनी छोटे परिवार के हालात के बारे में – लेखक

रणबीर सिंह दहिया की गरीबी पर एक रागनी

जमा छोटा सा परिवार म्हारा, फेर बी क्यों नहीं ठीक गुजारा।
यो चढ़ग्या सै करजा भारया , ज्याण मरण मैं आयी हे।।

1

मेहनत से हर काम किया , नहीं दो घड़ी आराम किया
किया गुंडयां नै जीणा हराम , इनकै लगावै कोण लगाम
डर लाग्या रहै सुबह शाम, इसे फ़िकर नै खाई हे ।।

2

हम दो हमारे दो का सै नारा यो, फेर बी घर सुखी ना म्हारा क्यों
न्यूं मनै कोये समझादयो नै, सारा खोल कै बता दयो नै
रोग की जड़ दिखला दयो नै, क्यों होती नहीं सुनायी हे।।

3

एक बेटा पढ़ता हिसार मैं , ओ पड़ता दो ढ़ाई हजार मैं
घरबार मैं मेर रही नहीं, मन की म्हारे ताहिं कहि नहीं
दिखती करज की बही नहीं, ब्याज नै करी तबाही हे।।

4

दूजा बेटा करै पढ़ाई न्यारी, बदेशी कम्पनी उनै बुलारी
भारी संकट मिलने का होग्या , बेरा ना प्यार कड़ै म्हारा खोग्या
म्हारै नश्तर घणे चुभोग्या ,न्यूँ घणी बेचैनी छाई हे।
5
म्हारा बाबू जी सै पंजाब मैं, नहीं रहता किसे की दाब मैं
जनाब मैं कोये भी कमी ना सै, फेर भी चढ़ी म्हारै खता सै
रणबीर किसनै पता सै, क्यूं चढ़री करड़ाई हे।।

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