सामाजिक सरोकार
शराब एक घृणित बुराई
रणबीर सिंह दहिया
यह समझना गलत है कि शराब पीने के दुष्परिणाम वही भुगतता है जो शराब पीता है ।दरअसल इस लत का खामियाजा पूरे परिवार को और एक ढंग से पूरे समाज को उठाना पड़ता है । पूरे जीवन को प्रभावित करने वाली शुरुआत भी ब्याह शादियों या त्योहारों से होती है । यह तो हम सब जानते हैं कि शराबखोरी एक बीमारी है जिसका इलाज किया जा सकता है ।
कुछ सर्वेक्षणों का सहारा लेकर कई डॉक्टर यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि प्रतिदिन 60 एम एल शराब का सेवन किया जा सकता है । लेकिन भारतीय परिस्तिथियाँ अलग हैं , भारत पश्चिम की बजाये ज्यादा गर्म देश है । इसलिए यहाँ एक सप्ताह में 60 एम एल का सेवन न किया जाये । और समाज सुधारकों की नजर से देखा जाये तो शराब का सेवन किया ही क्यों जाये? शराब यदि विनाशकारी है तो तो इसे विकास प्रक्रिया का हिस्सा क्यों बनाया जाये? शराब की फैक्ट्रियां और ठेके बन्द क्यों न किये जायें? यह बहस का विषय बना दिया जाता है।
शराब खोरी न केवल आर्थिक रूप से खोखला करती है बल्कि आंतरिक और रूहानी तौर पर भी दिवालिया बना देती है । अधिकांश मामलों में शराबखोर की पत्नी को सबसे अधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, साथ ही बच्चे भी कमोबेश मारपीट के शिकार होते रहते हैं ।
शराब के अधिक सेवन से होने वाली बीमारियां व नुकसान ~
1. कैंसर :
शराब के ज्यादा और लगातार सेवन से मुँह , जीभ, गले व खाना खाने वाली नली के कैंसर होने के खतरे बढ़ जाते हैं। दारू का सेवन इन जगहों पर लगातार इरिटेशन पैदा करता है । दारू और धूम्रपान दोनों कुल मिलाकर बाकि सारे कैंसर के कारणों से ज्यादा खतरनाक हैं । नशे बाजों में जिगर के कैंसर होने का रिस्क व दूसरी बीमारियों के होने की सम्भावना ज्यादा रहती है ।
2. जिगर(लीवर) का नुक्सान और जिगर की बीमारियां :
~शराब के ज्यादा सेवन से जिगर में फैटी लीवर की बीमारी हो जाती है ।
~अल्कोहलिक हेपेटाइटिस हो जाती है
~सिरोसिस की बीमारी हो जाती है
~ और फिर कैंसर भी हो सकता है
यह सब तरतीब में कई साल में होता है । यह समझ जाता है कि शराब के ब्रेक डाउन से बना एक पदार्थ जिसे एसिटेलडीहाइड के नाम से जाना जाता है जिगर की कोशिकाओं को प्रभावित करता है और डेमेज करता है । इस सबके चलते भूख लगनी भी प्रभावित .होती है और खानपान की कमी हो जाती है जिससे थायामिन( विटामिन बी वन ) की कमी हो जाती है। सिरोसिस और अल्कोहलिक हैपेटाइटिस की बीमारी लंबे दौर के सेवन के बाद होती है और सिरोसिस के 5 मरीजों में से 1 मरीज में कैंसर भी हो जाता है ।1/3 नशेड़ियों में जिगर की ये गम्भीर बीमारियां हो जाती हैं और दुसरे एक तिहाई में फैटी लीवर की समस्या हो जाती है।
3. नर्वस सिस्टम की बीमारियां :
थायामिन (विटामिन बी वन ) की कमी के कारण बैरीबैरी की बीमारी हो जाती है जो नरवों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है । ज्यादा कमी का असर दिमाग पर भी पड़ता है और Wernicke’s encephalopathy की बीमारी हो जाती है जिसमें कन्फ्यूजन , बोलने की समस्या, चलने में दिक्कत और आखिर में मरीज कॉम में चला जाता है । Korsakoff’s Psychosis की बीमारी भी हो सकती है । टांगों व बाजूओं की नसों पर भी असर पड़ता है । दर्द ,कमेड़े, सूनापन, कीड़ियां चलना और हाथों और टांगों में कमजोरी महसूस होती है। थायामिन के टीकों और अच्छी खुराक से काफी लाभ हो सकता है।
4. दिल और खून की नालियों पर कुप्रभाव :
थायामिन की अधिक कमी हर्ट फेल्युर पैदा कर सकती है मतलब हर्ट की खून को शरीर में पम्प करके भेजने की क्षमता कम हो जाती है । साथ ही हाथ पैरों में सोजीश बढ़ जाती है ।शराब के अधिक सेवन के कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हर्ट अटैक) की बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है ।ब्लड प्रेस्सर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है ।
5. दूसरी कई बीमारियां :
मसलन गैस्ट्रेटाइटिस , पैंक्रियटाइटिस, पेप्टिक अल्सर आदि ।
6. मनोरोग बढ़ने का खतरा :
चिंता और डिप्रेसन की बीमारी से ग्रस्त होने की सम्भावना बढ़ जाती है । इनका कारण आर्थिक संकट, काम न कर पाना और पारिवारिक अशांति होती हैं । डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है । आत्महत्या के प्रयास करने की इच्छा बढ़ने का खतरा बढ़ता है और वास्तव में नशेड़ियों में आत्महत्या ज्यादा होती हैं ।
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति और जनस्वास्थ्य अभियान आप सबसे और पूरे हरियाणा वासियों से अपील करते हैं कि शराब का सेवन न करें । कई बार हम समझते हैं कि एकाध बार पीने से क्या फर्क पड़ता है एमजीआर इसकी लत लगते देर नहीं लगती और लत लग जाने के बाद शराब छोड़ना मुश्किल हो जाता है । बाकि तरह के नशों से भी बचे रहने की अपील है ।
