नौजवान भारत सभा कैथल की बैठक में संगठन व समसामयिक मुद्दों पर चर्चा
नौभास के शताब्दी वर्ष पर युवाओं से संगठन से जुड़ने की अपील
भगत सिंह और उनके साथियों ने 1926 में की थी नौजवान भारत सभा की स्थापना
15 अगस्त को कैथल के बलराज नगर में नौजवान भारत सभा (नौभास) की कैथल इकाई द्वारा युवा साथियों के संगठन और समसामयिक मुद्दों पर बैठक आयोजित की गई। बैठक के परिचयात्मक सत्र में साथी जगविंदर ने बताया कि इस वर्ष शहीद-ए-आज़म भगतसिंह की क्रांतिकारी विरासत ‘नौजवान भारत सभा’ के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। मार्च 1926 में भगतसिंह और उनके साथियों ने युवाओं को संगठित करने तथा उनमें क्रान्तिकारी, वैज्ञानिक और प्रगतिशील चेतना विकसित करने के उद्देश्य से नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। नौभास ने सांप्रदायिकता का विरोध करते हुए हिन्दू-मुस्लिम-सिख एकता, मजदूरों-किसानों के अधिकार और शोषण-मुक्त समाज के निर्माण का लक्ष्य सामने रखा।
दूसरे सत्र में साथी सुनील ने युवाओं से नौजवान भारत सभा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज देश महँगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी, असमानता, भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। युवाओं को धर्म और जाति के नाम पर बाँटने के बजाय शिक्षा, रोज़गार और सम्मानजनक जीवन के अधिकारों के लिए संगठित होने की जरूरत है। भगतसिंह के शब्दों में, “क्रान्ति से हमारा अभिप्राय मौजूदा अन्यायपूर्ण व्यवस्था में आमूल परिवर्तन है।”
अंत में साथी अजय ने बताया कि नौजवान भारत सभा जनअभियानों, पुस्तकालय और अध्ययन मण्डल चलाती थी, क्रान्तिकारी साहित्य और पर्चों का वितरण करती थी तथा युवाओं को संगठित कर आन्दोलनों और वैचारिक-शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से जागरूक करती थी।
बैठक में युवाओं से नौजवान भारत सभा की क्रान्तिकारी विरासत को आगे बढ़ाने और भगतसिंह के सपनों के भारत के निर्माण के संघर्ष में शामिल होने की अपील की गई।

शहीदों की स्मृति और विचारों के प्रचार प्रसार के लिए उनकी यादों में बनी सभी सभाओं को संयुक्त मोर्चा बनाकर संगठित प्रयास करने होंगे ताकि हमारा प्यारा भारत बेरोजगारी महंगाई बीमारी अनपढ़ता असमानता जैसी अनेक बीमारियों से मुक्त हो सके।