पृथ्वी सिंह काकड़ – व्यवस्थित ढंग से काम के लिए पहचान

हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 119

पृथ्वी सिंह काकड़ – व्यवस्थित ढंग से काम के लिए पहचान

 सत्यपाल सिवाच

वैसे तो राजस्व पटवार एवं कानूनगो यूनियन के मंच से अनेकों ऐसे साथी आए हैं जिन्होंने अच्छे ढंग से काम करने के लिए पहचान बनाई। इस यूनियन के राज्य प्रधान रहे पृथ्वी सिंह काकड़ को अपनी यूनियन के अलावा सर्व कर्मचारी संघ के मंच पर भी ऐसी शोहरत हासिल हुई।  7 अप्रैल 1965 को फतेहाबाद जिले के ढाणी माजरा गांव में श्रीमती सोमती देवी और सहीराम के घर जन्मे पृथ्वी सिंह ने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अच्छी ख्याति प्राप्त की। वे पांच भाई और एक बहन हैं। उन्होंने दसवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और 3 फरवरी 1986 को राजस्व विभाग में पटवारी पद पर नियुक्त हो गए। वे 30 अप्रैल 2023 को कानूनगो पद से सेवानिवृत्त हुए।

उनकी पहली नियुक्ति भिवानी जिले में हुई थी। उस के कुछ महीने बाद सर्व कर्मचारी संघ का गठन हो गया और आन्दोलन शुरू हो गया। पटवार – कानूनगो एसोसिएशन उस आन्दोलन का हिस्सा थी। भिवानी राज्य के उन क्षेत्रों में शामिल था जहां आन्दोलन का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कहीं ज्यादा रहा। नयी नौकरी के बावजूद पृथ्वी सिंह काकड़ भी सक्रिय रहे। इसके चलते उन्हें सजा के तौर पर फिरोज़पुर झिरका में बदल दिया गया। आन्दोलन की सफलता ने उनमें आत्मविश्वास भर दिया। वे 1991 तक मेवात क्षेत्र में रहे।

उन्होंने उसके बाद सेवानिवृत्त होने तक हुए सभी आन्दोलनों में भाग लिया। सन् 1997 में उन्हें यूनियन का जिला प्रधान चुन लिया गया। वे फतेहाबाद में सर्व कर्मचारी संघ की जिला इकाई के भी पदाधिकारी रहे। सन् 2014 से 2017 वे राज्य के महासचिव और 2017-20 तक राज्याध्यक्ष रहे। यूनियन से जुड़ने के प्रसंग को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सन् 1986 संगठन का सम्मेलन अम्बाला में हुआ था। वहां यूनियन के धुरंधर नेता धुरेन्द्र सिंह चौहान के ओजस्वी और प्रेरणादायक भाषण ने उन्हें उत्साहित कर दिया था। एक बार संगठन से जुड़े तो आज तक भी वह बंधन अटूट बना हुआ है। यूनियन से जुड़ने का एक कारण वे यह भी मानते हैं कि पटवारियों पर पहले से कार्यभार अधिक है, साथ ही उन्हें दूसरे विभागों से सम्बन्धित काम भी दे दिए जाते हैं। ज़मीनी स्तर पर पशु गणना हो या जनगणना, वेरिफिकेशन हो अथवा प्रशासन के प्रबंधन का सवाल – उसमें पटवारी ड्यूटी लगा दी जाती है।

पृथ्वी सिंह काकड़ ने 1993 के ज्वाइंट एक्शन कमेटी के संघर्ष, 1996-97 के पालिका संघर्ष और 1998 के नर्सिंग आन्दोलन में भी अच्छी भूमिका निभाई। वे दो बार गिरफ्तार भी किए गए। पटवारियों की हड़ताल और आन्दोलन में तो उन्होंने बहुत समय दिया ही और सेवानिवृत्त होने पर भी यूनियन के चाहने पर मदद करते हैं।

उन्हें संघर्षों के दौरान परिवार से सहयोग मिलता रहा। नेताओं से निजी संपर्क की याद करते हुए कहते हैं कि पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यन्त सिंह चौटाला से निजी संपर्क रहे लेकिन कभी निजी लाभ नहीं उठाया। विभाग से जुड़े कार्यों के लिए डी सी, एसडीएम आदि से संपर्क रहे हैं। उनसे विभागीय कार्यों के अलावा कर्मचारियों के काम भी करवाए हैं। उन्होंने हमेशा संगठन के साथ स्टैंड लिया है और किसी प्रकार के अकरणीय काम नहीं किए। उन्हें लगता है कि मौजूदा दौर में अधिक समन्वय से काम करने की जरूरत है। वर्तमान नेताओं को इसके बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पृथ्वी सिंह काकड़ का विवाह सन् 1981 में श्रीमती परमेश्वरी देवी के साथ हुआ। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बेटे निजी काम करते हैं। बेटी की शादी हो चुकी है।

लेखक – सत्यपाल सिवाच

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *