किशन सहाय एक आई पी एस और सामाजिक कार्यकर्ता

किशन सहाय एक आई पी एस और सामाजिक कार्यकर्ता

गुरमीत अंबाला

एक आई.पी. एस.अधिकारी रिटायर होते-होते इतना तो कर ही लेते हैं कि आगे की जिंदगी ठाट-बाट से बिता सकें,लेकिन किशन सहाय जब अधिकारी पद से 31 जुलाई 2026 को रिटायर हुए, तो किराए का घर ढूंढने लगे। कारण यह था कि उन्हें अपना सरकारी आवास खाली करना था। उनकी कहानी सचमुच एक मिसाल है।

किशन सहाय राजस्थान कैडर के आई.पी. एस.अधिकारी रहे हैं पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद से रिटायर हुए हैं।

उच्च पद पर रहते हुए भी किशन सहाय सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे,अपनी व्यस्त पुलिस सेवा से अतिरिक्त समय निकाल कर समाज से जातिवाद, अंधविश्वास मिटाने एवं मानववाद और वैज्ञानिक चेतना के अपने मिशन में लगे रहे ,समय समय पर अपने हमख्याल साथियों से मिलकर वैज्ञानिक चेतना के कार्यक्रम लगातार करते रहे।

वह मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले हैं।

उन्होंने कई जिलों में एस .पी.के रूप में सेवा निभाई और अन्य उच्च पदों पर रहे।

वह इतने ईमानदार अपनी पुलिस सेवा में रहे कि अपने लिए एक घर तक नहीं बना सके।

रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया था:

*”मैं रिटायर होने वाला हूँ। सरकारी मकान खाली करना पड़ेगा। शहर में मेरा अपना कोई अन्य घर नहीं है, इसलिए जयपुर के मालवीय नगर या जगतपुरा इलाके में किराए के घर की जरूरत है।”*

इस पोस्ट पर सैकड़ों प्रतिक्रियाएं आईं। उम्मीद है कि उन्हें घर मिल गया होगा।

रिटायरमेंट वाले दिन उन्होंने लिखा:

*”आज मैं IPS IG के पद से रिटायर हो रहा हूँ। मैंने अपनी ड्यूटी हमेशा पूरी ईमानदारी से निभाई और जितनी हो सकी, आम लोगों की मदद की। जब तक व्यवस्था सभी के लिए एक समान नहीं बन जाती तब तक ऐसी मदद की जरूरत सभी को पड़ती रहेगी।*

*उनका धन्यवाद ,जिन्होंने ऐसी मदद में उनका साथ दिया”*

आम तौर पर रिटायरमेंट के मौके पर दावतें, जश्न और विदाई समारोह होते हैं, लेकिन किशन सहाय ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। न कोई विदाई समारोह, न कोई जुलूस और न ही खाने-पीने का कोई प्रबंध।

उनका कहना था:

*”यह सब फिजूलखर्ची है। यह तो नौकरी के मृत्यु-भोज (श्राद्ध) जैसा लगता है।”*

उन्होंने यह भी कहा:

*”अब मैं लोगों के साथ मिलकर देश में धार्मिक अंधविश्वास, जातिवाद और छुआछूत को खत्म करने के लिए एक अभियान शुरू करूँगा।”*

किशन सहाय नास्तिक,मानववादी और वैज्ञानिक चिंतक हैं। ईमानदारी के मामले में राजस्थान में उनका नाम एक मिसाल के तौर पर लिया जाता है।

रिटायर्ड IPS अधिकारी श्री किशन सहाय जी को सलाम!

निश्चय ही वैज्ञानिक चेतना आंदोलन को वे आगे बढ़ाने के लिए सदा लगे रहेंगे,और हमख्याल लोगों को संगठित करते रहेंगे।

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