राजेश भारती की कविता – पेट

कविता

पेट

राजेश भारती

 

पेट के लिए खेत जोता
पेट के लिए मजदूरी की
पेट के लिए गाली खाई
पेट के लिए अंगूठा लगाया
पेट के लिए गाय बेची
पेट के लिए मैला ढोया
पेट के लिए जूते गांठें
जब पेट भर गया तो
उन्होंने कहा
पेट भरते ही अकड़ आ गई।