HomeBlogराजेश भारती की कविता – काॅकरोच राजेश भारती की कविता – काॅकरोच 22 May 202622 May 2026Pratibimb Samachar राजेश भारती की कविता – काॅकरोच मेरी पत्नी चीख़ी मैंने कहा डरो मत ये तो बस हमारी व्यवस्था का प्रतीक है। जो गंदगी में भी खुशहाल रहता है। Post Views: 138 Like 0 0 Comments
रमेश जोशी का व्यंग्य- दिल्ली का ठग, मोहब्बत और नेहरू व्यंग्य दिल्ली का ठग, मोहब्बत और नेहरू रमेश जोशी हमारे एक कोई तीस-पैंतीस साल पुराने परिचित कनिष्ठ मित्र हैं…
न रोई, न चिल्लाई, न थाने गई—सीधे किताब लिख दी न रोई, न चिल्लाई, न थाने गई—सीधे किताब लिख दी विजय शंकर पाँडेय जापान वैसे तो तकनीक, अनुशासन और शालीनता…
नरेंद्र चौहान बने प्रोटोकॉल अधिकारी चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने नरेंद्र सिंह चौहान को हरियाणा सिविल सचिवालय चंडीगढ़ में प्रोटोकॉल अधिकारी के तौर पर…