कविता
मोबाइल की दुनिया के…. उस पार का सन्नाटा
डॉ रीटा अरोड़ा
माँ ने रसोईघर से धीरे से पुकारा,
अजी सुनते हो खाना ठंडा हो रहा,
पिता ने बिना नज़र उठाए कह दिया,
दो मिनट बस एक ज़रूरी मेल कर रहा,
थाली में प्यार सजा रह गया,
और वक्त मोबाइल में बँटता रह गया।
दादा जी ने मुस्कुराकर पूछा,
बेटा, आज स्कूल में क्या सीखा?
नज़रें उठे बिना जवाब आया,
दादाजी, रुको, अभी गेम चल रहा,
बचपन सामने था, पर ध्यान कहीं था और,
रिश्ता पास था पर मन कहीं था और ।
एक ही घर में एक ही छत के नीचे,
सब साथ तो हैं पर साथ नहीं,
दिल पास हैं पर दूरियां ऐसी,
जैसे अपनेपन का अब एहसास नहीं।
जिस मोबाइल की दुनिया ने,
सात समंदर पार लोगों को जोड़ दिया,
जो बैठा था बिल्कुल पास हमारे,
उसे मीलों – मीलों दूर कर दिया।
अब हर चेहरे पर मोबाइल की दुनिया है,
और हर दिल में एक सन्नाटा है,
हजारों “फ्रेंड्स” हैं ऑनलाइन,
पर अपना कहने वाला कोई नहीं आता है ।
शादी हो या पार्टी हो या कोई हो मिलन,
सब साथ आते हैं खाते हैं, पर ये मिलन, मिलन नहीं,
चेक-इन और अपलोड की दौड़ में,
हम लम्हों को जीते ही नहीं।
पहले हर शाम को घर में हंसी होती थी,
हर कोने में अपनापन बसता था,
अब हर हाथ में मोबाइल है,
और हर चेहरा उसी में हँसता है।
फोटो तो खूबसूरत खींच लेते हैं हम,
पर यादें धुंधली रह जाती हैं,
एक फिल्टर के पीछे छुपी ज़िंदगी,
हकीकत से तो दूर ले जाती है।
दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर,
हम अपनी सादगी भूल जाते हैं,
लाइक्स और कमेंट्स के तराजू में,
अब रिश्तों को भी…… तौल जाते हैं।
बातें अब शब्दों से नहीं, इमोजी से होती हैं,
दिल की गहराई अब अक्सर अधूरी होती है,
पर क्या एक रोता हुआ चेहरा
उस आँसू का दर्द बता पाता है?
जो कभी कंधे पर सिर रखकर,
चुपचाप बह जाया करता था।
नहीं
सच तो यह है, सच तो यह है,
मोबाइल की दुनिया ने जानकारी से तो भर दिया,
पर संवेदनाओं में बस हमें, खाली सा कर दिया,
किसे पता था ये स्मार्टफोन, दिलों में ऐसी दूरी लाएगा,
पास बैठे अपनों से ज़्यादा, अब ये चार्जर हमें याद आएगा।
अब वक्त है, थोड़ा रुकने का,
अब वक्त है, थोड़ा ठहरने का,
मोबाइल की दुनिया को अब थोड़ा आराम दें,
अपने आसपास की धड़कनों को हम सुन सकें।
क्योंकि
दिल को किसी डिवाइस की नहीं,
दिल को किसी अपने की ज़रूरत होती है,
जो बिन बोले, खामोश दिल को पढ़ ले ,
जो बिन बोले, आँखों की नमी समझ ले,
किसी रूहानी अहसास की ज़रूरत होती है
वरना भीड़ में हर धड़कन बस अकेली और तन्हा होती है
