कविता
शिक्षा
राजेश भारती
शेरनी का वो भी दूध है
जिसे जो भी पीएगा
वह दहाडे़गा
ऐसा बाबा साहब ने कहा था
लेकिन अब
वही दूध बेचा जाता है
सोने के कटोरे में
जिसके पास कटोरा नहीं
वह चाटता रह जाता है
फर्श पर गिरी बूँदें
हकीक़त यह है
कि आज ये दूध
इतना महंगा हो चुका है
कि इसे आम आदमी
अफोर्ड ही नहीं कर पा रहा
यह दूध
वकीलों, प्रोफेसरों
डॉक्टरों, बैंकरों के बच्चों की
पहुँच से भी दूर है
बस नेताओं और व्यापारियों के
बच्चों के लिए ही अफोर्डेबल है
———-
