कविता
भेड़
-मंजुल भारद्वाज
पत्थर पूजने का विरोध किया
उन्होंने कहा नास्तिक हो !
पाखंड का विरोध किया
उन्होंने कहा संस्कार विरोधी हो !
कुरीतियों का विरोध किया
उन्होंने कहा संस्कृति विरोधी हो !
सरकार से सवाल पूछा
उन्होंने कहा राष्ट्रद्रोही हो !
विचार करो,विवेक धरो
संविधान से चलो
उन्होंने कहा हिन्दू विरोधी हो !
सत्यमेव जयते
उन्होंने कहा सत्तामेव जयते!
…
