जयपाल की दो कविताएँ
ईश्वर के कण
यह बात तो सब जानते हैं
कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त है
लेकिन वे कण कहां व्याप्त हैं
कोई नहीं जानता
इसके लिए
अभी और अधिक खून बहाना होगा
बस्तियां जलानी होंगी
घरों पर चलाने होंगे बुलडोजर
इंसानियत को करना होगा जमींदोज
कुछ देशो को तबाह करना होगा
बनाना होगा अखंड राष्ट्र
तब जाकर मिलेगा ईश्वर
और वे कण भी
जिनमें ईश्वर रहता है
हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए
हे ईश्वर,हे ख़ुदा !
हम लड़ेंगे तुम्हारे लिए
जब तक लड़ने की ताकत बाकी है
हम लड़ेंगे तब तक
जब तक लड़ते-लड़ते मर नहीं जाते
ख़ून के आखरी कतरे तक
हम लड़ेंगे उन सबके खिलाफ
जो तुम्हारे खिलाफ होंगें
हम उनके सर कलम कर देंगें
जो तुम्हारे सामने सर उठाएंगे
हम अपना भी सर कलम कर लेंगे
अगर तुम्हारा सर न बचा सके
हम लड़ते रहेंगे तुम्हारे लिए
जब तक रहेगी यह दुनिया
