जयपाल की दो कविताएँ
*बम गिरा
दो देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ
पहला बम विवेक पर गिरा
दोनों तरफ का विवेक ध्वस्त हो गया
दूसरा बम गिरा संवेदनशीलता पर
दोनो तरफ की संवेदनशीलता पत्थर हो गई
तीसरा बम विश्वास पर गिरा
एक दूसरे पर विश्वास जल कर राख हो गया
चौथा बम गिरा भावनाओं पर
भावनाएं अंगारों में बदल गई
पांचवां बम आदमी होने पर गिरा
आदमी जानवर हो गए
उसके बाद तो पता ही नहीं चला
कौन सा बम किस पर गिरा
*अद्भुत अंदाज
जिस अद्भुत अंदाज में
जान की बाजी लगाकर
वे बच्चों का कत्ल करते हैं
महिलाओं का बलात्कार करते हैं
घरों में आग लगाते हैं
सडकों पर लाशें बिछाते हैं
उसी अद्भुत अंदाज में
वे परमात्मा के आगे सिर भी झुकाते है
धर्मग्रंथों का पाठ भी करते हैं
मंत्रोच्चारण करते हैं
सर्वे भवन्तु सुखिनः
उनका अंदाज सचमुच में अद्भुत हैं !!

अच्छी कविताएँ