प्रेम में बोलती कविताएं

 

प्रेम में बोलती कविताएं

  • रोज़लीन का कविता संग्रह शब्द…आकाश हो गए

जयपाल

‘शब्द..आकाश हो गए’– शीर्षक से अभी हाल ही में रोज़लीन का कविता संग्रह छपकर आया है ।इन कविताओं के बारे में रोज़लीन स्वयं कहती हैं कि ये कविताएं हैं प्रेम, प्रकृति, दर्शन, कल्पना और फैंटेसी से भरी हुई हैं…इनमें रंग, सुष्मिता, कल्पना, सत्यता, प्रेम, जीवन की असीम संभावनाएं और उन्मुक्तता है। यूक्रेन के विद्वान यूरी बोत्वीकिन इन कविताओं के बारे में कहते हैं—ये कविताएं एक दिव्य थैरेपी जैसी हैं.. इनमें सौंदर्य सकारात्मकता और प्रेम की बातें भरी हैं..ना कोई निराशा… न कोई सामाजिकता.. न कोई दुख…’प्रेम तथा सौंदर्य इस जगत को नहीं बचा सकते पर इसका अंत व्यर्थ होने अवश्य न देंगे’
रोज़लीन की कविताएं हमें मुक्ति करती हैं। प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य से हमारा साक्षात्कार कराती हैं मानों कह रही हैं..प्रकृति के इस स्वरूप के बिना यह दुनिया रहने लायक नहीं हो सकती..इसलिए इस दुनिया को अगर रहने लायक बनाना है तो इस प्राकृतिक परिवेश को भी रहने लायक बनाना होगा। सारा सामाजिक संघर्ष मनुष्य के इसी प्राकृतिक स्वरूप को बचाए रखने की क़वायद ही तो है।
इन कविताओं में प्रेम की सुगंध मानवीय संवेदना बनकर फैल रही है।यह प्रेम दो व्यक्तियों के बीच से बाहर निकलकर पूरे भौतिक परिवेश को प्राणवान बनाता है । यही इन कविताओं की सार्थकता है और विशेषता है । भले ही रोज़लीन द्वारा इन कविताओं को निजी अनुभूतियों की भाव-प्रवण यात्रा कहा गया है लेकिन ये हर कल्पनाशील व्यक्ति की संवेदनाओं को बहुत गहरे स्पर्श करती हैं। ये कविताएं थोड़ा ठहरकर और धैर्य रखते हुए ही पढ़ने का आग्रह करती हैं । कविता का शीर्षक ‘शब्द आकाश हो गए’ का अर्थ यही है कि शब्द फैल रहे हैं और यह फैलाव पाठक महसूस करे।
उनकी कविता ‘एक भाषा खिली धूप में’
शब्द ना हों
तो भी भाषा
फैहरती है हवा पर
पानी, गीत, खुशबू
मौसमों, धूप छाँव पर…

भाषा
और भाषा के अर्थ
और इशारे
असीम को फर्लांग जाते हैं

एक भरपूर जीवन जीने के लिए इस भाषा को अपने जीवन में उतारना उतना ही जरूरी है जितना की इस ब्रह्मांड में अंतरंगता के साथ जीना और विचरना।
कविताएं कैसी हैं..यह तो आप पढ़कर ही जान पाएंगे।
‘शब्द..आकाश हो गए’ काव्य- संग्रह के प्रकाशित होने पर रोजलीन को बहुत-बहुत बधाई!!

पुस्तक-शब्द–आकाश हो गए/कविता संग्रह
कवयित्री– रोज़लीन
कीमत–185/-( पेपर बैक)
प्रकाशक– नोशन प्रेस

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