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धर्मेन्द्र आज़ाद की कविता – उठता ज्वालामुखी

कविता उठता ज्वालामुखी धर्मेंद्र आजाद   सुबह की धुंध में लिपटा मज़दूर, अधूरी नींद आँखों में लिए, दिन भर अपना…