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सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की एक कविता

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना की एक कविता पटाखे जलें या पराली जले, चाहे जलें कारखाने, या जलें गाड़ियों के इंजन पुराने,…