रणबीर सिंह दहिया का हास्य व्यंग्य- टोटका
पीगी तै किट किट मैं ए पीगी
एक बै एक महानुभाव अपनी घोड़ी पै किसे दूर शहर मैं जावण की तैयारी कर कै घोड़ी पै चढ़ कै चाल पड़े। गर्मियां के दिन थे। चलते चलते दोफारा होग्या। घोड़ी तिसाई होगी। महानुभाव नै देख्या अक एक खेत मैं रैहट चला रहया था एक किसान । वो घोड़ी नै रैहट पै लेग्या अर घोड़ी के पानी पीवन ताही लगाम ढीली कर दी । घोड़ी पानी पीवण लागी तो रैहट मैं तैं किट की जोर की आवाज आयी। घोड़ी बिदक कै पाच्छे नै होगी। सवार नै फेर लगाम ढीली कर कै इशारा करया पानी पीवन ताहिं , घोड़ी नै मुंह तले नै करया तो फेर किट की आवाज होगी। घोड़ी फेर बिदक गी । तीन चार बार न्यों ए हुया तो सवार किसान तैं बोल्या भाई या किट किट बंद करदे घोड़ी बिदकै सै।
किसान बोल्या – पीगी तो किट किट मैं ए पीगी ना तो पाणी कित सै!
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गणेश कै हाथी का सर किसनै लाया?
हरियाणा के आर्यसमाजी भजनी नरसिंह जी हुए । एक बार एक सभा मैं गणेश का जिक्र हुया तो एक टोटका सुनाया उणनै :-
एक बार रोहतक के टेशन पर एक टी टी ला दिया। मकान मिलग्या । भैँस बांधली । मौज होरी थी। एक दिन टिकट काटते काटते नै देख्या अक भैंस तो ट्रैक मैं खड़ी सै। दिल्ली कान्ही की गाड्डी आवन लागरी थी। उसनै भाजकै जाकै भैंस कै धक्का मारकै ट्रैक तैं बाहर करण की सोची। भाजकै गया अर धक्का मारया ।भारया थी । उल्टा वो खुद ट्रैक मैं घलग्या। ट्रेन आई अर दोनुआ नै बीच तैं काटगी। धोरे कै एक बड्डा पहोंचे औड़ बाबाजी जा था। उसनै सारा नजारा देख्या अर सैड़ दे सी तावल करकै भैंस का पाछा अर टी टी का आगा जोड़ दिया। मौज होगी टी टी की। दिन मैं टिकट काटै टेशन पै और तड़कै साँझ नै 10 किलो दूध काढ़ कै पीवै।
लोग बाग़ कहन्ते — दादा या बात तो होण की कोण्या।
नरसिंह भजनी कहते- फेर गणेश कै हाथी का मुँह क्यूकर लॉग सकै सै?
