हरियाणा में ओबीसी जातियों की समस्या व समाधान -एक समीक्षा
डॉ. रामजीलाल
भारत का एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका, हरियाणा, महाभारत काल से ही अलग-अलग धर्मों और जातियों के योगदान का गवाह रहा है. इन समूहों में, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है; राज्य की कुल 2.82 करोड़ की आबादी में इनकी हिस्सेदारी लगभग 34% है.अन्य पिछड़ा वर्ग में लगभग 78 अलग-अलग जातियां शामिल हैं और हरियाणा में नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में इन्हें कुल 27% आरक्षण मिलता है. ओबीसी को दो उप-श्रेणियों में बांटा गया है: ओबीसी ब्लॉक A – 16%) और ओबीसी ब्लॉक B – 11%).ओबीसी क्रीमी लेयर के लिए सालाना आय की सीमा ₹8 लाख ह राज्य की कुल आबादी में ओबीसी (A) वर्ग की हिस्सेदारी 18.93% है, जबकि ओबीसी (B) ओबीसी की हिस्सेदारी 15.05% है.
ओबीसी जातियों का मुख्य व्यवसाय कृषि ,डेयरी ,परिवहन लघु उद्योग, सरकारी सेवाएं तथा निजी क्षेत्र में नौकरियां और अन्य व्यवसाय हैं .जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा की राजनीति में पंचायत से लेकर संसद तक ओबीसी की अपनी विशेष पहचान और भूमिका है. परंतु जब हम 2026 में खड़े होकर आंकड़े देखे हैं तस्वीर साफ है .ओबीसी जातियों की संख्या अधिक है, हिस्सेदारी कम है .आरक्षण मिला पर सब योजनाएं अधर में लटक गई. .यद्यपि स्थानीय स्तर नेतृत्व बढ़ा है पर नीति निर्माण में आवाज अभी भी बहुत अधिक कमजोर है .
सबसे बड़ी चुनौती अतिरिक्त असमानता की है.ओबीसी-बी की कुछ जातियों की शिक्षा,प्रशासन और राजनीति में सहभागिता में वृद्धि हुई है. ओबीसी-ए आज भी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहा है .इसलिए उचित लाभ देने हेतु व्यापक सर्वे करके उप -वर्गीकरण की आवश्यकता है. अर्थात उनको हम ओबीसी की वंचित जातियों की श्रेणी का नाम देंगे क्योंकि ऐसी जातियां भी है जो भूमि हीन हैं और उनके पास रोजगार के स्थायी साधन नहीं है.
हरियाणा की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ कृषि है राज्य में 55% ओबीसी परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में खेती और पशुपालन से जुड़े रहे हैं. परन्तु जैसे -जैसे परिवारों का विभाजन होता जा रहा है और एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं वैसे-वैसे भूमि का छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन होता जा रहा है. ओबीसी किसान की औसतन जोत 1.5 एकड़ है जबकि राज्य की औसतन जोत 2 .4 एकड़ है. अतः ओबीसी किसान सीमांत और लघु श्रेणी में आते हैं और वह आधुनिक कृषि तकनीकों का समुचित उपयोग नहीं कर सकते. कृषि कार्य घाटे का सौदा बनता जा रहा है और जीविका चलाने हेतु काम की खोज में शहरों में पलायन कर रहे हैं .यदि उनको वैकल्पिक रोजगार मिल जाए वे कृषि कार्य को हमेशा के लिए अलविदा कर देंगे.
अन्य शब्दों में 67 प्रतिशत ओबीसी किसान सीमांत लघु श्रेणी में होने के कारण समाज के हाशिए पर रहते हैं .शहरी ओबीसी का 40% हिस्सा असंगठित क्षेत्र – ऑटो रिक्षा, ढाबों,छोटे कारखानों,दुकानों इत्यादि में लगा हुआ है. पूंजी, बीमा सरकारी योजनाओं की पहुंच सबसे कम है .
रोजगार का संकट भयानक महामारी की तरह निरंतर बढ़ रहा है .इसमें केवल ओबीसी के युवा ही नहीं अपितु अन्य श्रेणियों के युवा भी बहुत बुरी तरह प्रभावित हैं .सीएमआईई .(CMIE )के अनुसार 18- 29 आयु के वर्ग में ओबीसी बेरोजगारी दर 14. 7% है जबकि राज्य में यह 12.1 प्रतिशत है. हरियाणा में तो डिग्री धारी भी बेरोजगार हैं. निजी क्षेत्र-स्कूलों,कालेजों,व विश्वविद्यालयों तथा अनुबंध पर आधारित नियुक्तियों में आरक्षण नहीं है.
शिक्षण संस्थाओं मे प्रवेश बढ़ा,परंतु गुणवत्ता में ठहराव नहीं है. हरियाणा में प्राथमिक शिक्षा में ओबीसी का नामांकन 98% है .यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. परंतु वहीं 12 वीं कक्षा के बाद यह गिरकर 31% रह जाता है. इंजीनियरिंग, मेडिकल, सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का दर सामान्य वर्ग के 40% से भी कम है . इसके मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर,आर्थिक तंगी ,कोचिंग का अभाव ,कैरियर मार्गदर्शन की कमी ,घरेलू वातावरण व माता-पिता की बेरोजगारी व आर्थिक तंगी हैं.
जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने 7 अगस्त 1990 को संसद में 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की और 13 अगस्त 1990 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई, तो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ (16 नवंबर 1992) मामले में, सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने जाति-आधारित आरक्षण की सीमा 50% तय करते हुए 27% आरक्षण को बरकरार रखा. भारत सरकार ने इस फैसले के बारे में 13 सितंबर 1993 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की
भारत की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी क्रमशः 16.6% और 8.6% है, जबकि OBC की आबादी भारत की कुल आबादी का 52% है. दूसरे शब्दों में, 74.12% (SC/ST/OBC) वर्ग के लिए 50% आरक्षण तय किया गया, जबकि सामान्य श्रेणी—जिसमें आबादी का 25.28% है—के लिए भी 50% रखा गया. साथ ही, ‘क्रीमी लेयर’ का नियम लाकर आरक्षण नीति को कमजोर कर दिया गया। यह पिछड़े वर्गों के लिए एक बड़ा झटका था; फिर भी, जाति-आधारित आरक्षण का विरोध जारी है. हालांकि, सांसद, विधायक, राष्ट्रीय मुख्यधारा की मीडिया और बुद्धिजीवी कई मुद्दों पर चुप रहते हैं, जैसे कि मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्स में अनिवासी भारतीयों(NRI) के लिए पेमेंट-आधारित आरक्षण, नौकरशाही में सेवा विस्तार और रिटायरमेंट के बाद फिर से नौकरी मिलना, सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री, और विश्वविद्यालयों में प्रोफेशनल अनुभव के आधार पर प्रोफेसरों की भर्ती—जिससे बिना जरूरी डिग्री के भी नौकरी मिल जाती है..
सन् 1993 से सन् 2024 के अंतराल में भजन लाल, बंसी लाल, ओम प्रकाश चौटाला, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर—ये सभी सामान्य श्रेणी के मुख्यमंत्री रहे—लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को उसकी भावना और अक्षरशः लागू नहीं किया. हरियाणा में यह केवल 15% था. सन् 2024 के चुनाव से पूर्व मनोहर लाल खट्टर (सामान्य श्रेणी) की जगह नायब सिंह सैनी (ओबीसी)को मुख्यमंत्री बनाया गया. हरियाणा के निर्माण के पश्चात ओबीसी के दूसरे मुख्यमंत्री हैं. वोट बैंक को ध्यान रखते हुए जून 2024 में लगभग तीन दशक के पश्चात नायब सिंह सैनी ने आरक्षण की सीमा 15% से बढ़कर 27 % और क्रीमीलेयर को ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹8लाख करने की सार्वजनिक घोषणा की. इससे बीजेपी को चुनावी लाभ मिलना स्वाभाविक था.
क्रीमी लेयर की सीमा 6 लाख रूप से बढ़ाकर 8 लाख रुपए कर दी गई और इसमें वेतन व कृषि आय सम्मिलित नहीं होगी. (इंडिया टीवी हिंदी, 2024) .एक अनुमान के अनुसार इससे लगभग 4.5 लाख अतिरिक्त परिवार आरक्षण के दायरे में आएंगे . पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत 1.2 लाख छात्रों को 900 करोड़ की सरकार के द्वारा सहायता की गई है. परन्तु छात्रवृति से प्रवेश तो मिलता है , सफलता नहीं . अतः हमारा सुनिश्चित मत है कि प्रत्येक मंडल में आवासीय कोचिंग सेंटर और काउंसलिंग सेल सरकार के द्वारा खोले जाने चाहिए.यह कदम ओबीसी को केवल प्रोत्साहित ही नहीं करेगा अपितु उनको सुयोग्य बनाएगा. परन्तु आवासीय कोचिंग केंद्रों में बिना किसी सिफारिश के प्रशिक्षित ,अनुभवी , व सुयोग्य विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए तथा इनका और लाभार्थियों का निश्चित अवधि के पश्चात सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति जिसमें बहुमत ओबीसी के सदस्यों का हो, के द्वारा निरीक्षण व मूल्यांकन किया चाहिए.
प्रशासन में आरक्षण बढ़ा ,परंतु अनुपात बिगड़ा है .हरियाणा सरकार में लगभग 3.6 लाख नियमित कर्मचारी है और 1.1 लाख एचकेआरएन (HKRN) कर्मचारी हैं .यहां आरक्षण का गणित महत्वपूर्ण है. अब तक हरियाणा सरकार के समूह ए और समूह बी के अधिकारियों में ओबीसी का प्रतिनिधित्व 15% था,जबकि सी और डी समूह के कर्मचारियों में ओबीसी में 27% था .हरियाणा सरकार ने बढ़ाकर सभी समूहों में 27% करने की घोषणा की है (इंडिया टीवी हिंदी 2024) .इसके साथ ही बीसी-ए और बीसी-बी के बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की बात भी की है .एचकेआरएन की भर्तियों में भी 27% लागू करने की करने की घोषणा की गई . अनुमान है कि इससे 6400 नए पद ओबीसी को मिलेंगे व 6000 बैकलॉग पद भरे जाएंगे.
परन्तु जमीनी हकीकत क्या है? अनुमानित आंकड़े बताते हैं कि समूह-ए में ओबीसी अधिकारी केवल 9% – 11% हैं व समूह- बी में 13 प्रतिशत हैं .जितना हम प्रशासनिक पदसोपान में ऊपर बढ़ते जाएंगे , उतना ही ओबीसी का प्रतिनिधित्व घटता चला जाएगा.हरियाणा सरकार के की जनगणना रिपोर्ट सन्2003 व सन् 2016 तक सभी वर्ग की सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व अनुसूचित जाति वर्ग से भी बहुत कम है .सन् 2023-24 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकारी सेक्टर और फैक्ट्रियों में वर्क फ़ोर्स यूनिट्स में 413733,ऑर्गनाइज़्ड कंपनियों में एम्प्लॉईज की संख्या 1310533 व बोर्ड/कार्पोरेशन/एजेंसी/अथॉरिटी में एम्प्लॉईज की संख्या 66865 है. परंतु इसमें ओबीसी अथवा एससी वर्गीकरण विद्यमान नहीं है. हरियाणा सरकार ने एससी वर्ग को अन्य एससी व वंचित एससी में बांट कर 20% कोटे में से 10 % कोटा दिया. हमारा अभिमत है कि एससी अति वंचित एससी वर्ग की भांति ओबीसी में भी अति वंचित-तीसरा वर्ग बना कर उसके लिए विशेष कोटा निर्धारित किया जाए.
शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश बढ़ा -परंतु गुणवत्ता में ठहराव नहीं है. हरियाणा में प्राथमिक शिक्षा में ओबीसी का नामांकन 98% है .यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. परंतु UDISE Plus 2024-25 के अनुसार ओबीसी का नामांकन सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्तरों पर 9 वीं -10 वीं में 27.7%,11 वीं -12 वीं में 27.9% है. प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक प्रवेश दर केवल 29.2% है, जो सभी स्तरों पर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. .
यह वाकई चिंता का विषय है, क्योंकि बिना शिक्षित व्यक्ति भविष्य में कैसे प्रगति कर सकेगा? इंजीनियरिंग, मेडिकल, सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का दर सामान्य वर्ग के 40% से भी कम है . यद्यपि हरियाणा सरकार के द्वारा कुछ सार्थक कदम उठाए गए हैं परन्तु अभी तक अधिक कारगर सिद्ध नहीं हुए. लों में शिक्षा के गिरते स्तर के कोचिंग का अभाव ,कैरियर मार्गदर्शन की कमी ,घरेलू वातावरण व माता-पिता की बेरोजगारी व आर्थिक तंगी मुख्य कारण हैं
रोजगार का संकट भयानक महामारी की तरह निरंतर बढ़ रहा है .इसमें केवल ओबीसी के युवा ही नहीं अपितु अन्य श्रेणियों के युवा भी बहुत बुरी तरह प्रभावित हैं .सीएमआईई(CMIE) के अनुसार 18- 29 आयु के वर्ग में ओबीसी बेरोजगारी दर 14. 7% है जबकि राज्य में यह 12.1 प्रतिशत है. निजी क्षेत्र सहित स्कूलों,कालेजों,व विश्वविद्यालयों में अनुबंध पर आधारित नियुक्तियों में आरक्षण ओबीसी की जनसंख्या के अनुसार लागू किया जाए.
हरियाणा के ओबीसी को सहानुभूति की जरूरत नहीं है . जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व चाहिए . 27% आरक्षण को लागू किया जाए और बैकलॉग भरा जाए. हर साल 15 अगस्त को हरियाणा सरकार के द्वारा रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए. शिक्षा और कौशल मिशन के द्वारा प्रत्येक जिले में ओबीसी के उत्कृष्ट बच्चों को निशुल्क कोचिंग ,लैपटॉप और प्लेसमेंट में सहायता मिलनी चाहिए . 500 करोड़ का ओबीसी उद्यम निधि बनाकर 25 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण 50% देने की व्यवस्था की जानी चाहिए. बी सी -ए और बी सी -बी के द्वारा त्रैमासिक संवाद किया जाए ताकि अंदरूनी प्रतिस्पर्धा और विभिन्न जातियों के मध्य जो तनाव है उसको कम करने का प्रयास किया जाए.
अंततः ओबीसी वास्तव में हरियाणा के विकास का आधारभूत स्तंभ है. विकास की इमारत तभी खड़ी होगी जब ईमानदारी से सरकारी घोषणाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा . आरक्षण वंचित वर्गों का अधिकार है, भीख नहीं. अधिकार मांगने से नहीं मिलते. जागरूकता, संगठन, एकता और संघर्ष अधिकारों को प्राप्त करने और सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक शर्तें हैं

Respected sir,You have presented a detailed and thoughtful analysis of the social, economic, and educational challenges faced by the OBC communities in Haryana. The article goes beyond the issue of reservation and highlights significant concerns related to education, employment, agriculture, representation, and the need for inclusive development. True progress of any society depends on equal opportunities, quality education, skill development, and effective implementation of welfare policies. This research-based article provides valuable insights for policymakers as well as the society at large. Heartiest congratulations and best wishes to sir for bringing such an important issue into public discussion.
With Regards
Dr Amol
I am thankful to the editor for the publication of the article on Issues and Solutions-regarding the OBC Castes in Haryana: A Review.I am thrilled to know the response of the learned readers, also which provides oxygen to work and write for my beloved readers.
DR.Ramjilal,Social Scientist,Former principal, Dyal Singh college ,Karnal-Haryana