हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-112
किशोरीलाल मेहताः यूनियन के साथ समाजहित के कार्यों में सहभागिता के हिमायती
सत्यपाल सिवाच
सिरसा निवासी किशोरीलाल मेहता वो शख्स हैं जो वहाँ होने वाले सामाजिक आयोजन में आगे मिलते हैं। उनके साथ वर्षों से यह रिश्ता ताजा बना रहता है। किशोरीलाल का जन्म 10 दिसंबर 1951 को तत्कालीन हिसार (अब सिरसा) जिले के गिदड़ांवाली गांव में श्रीमती नानकीबाई और श्री बेलाराम मेहता के घर हुआ। वे तीन भाई और तीन बहने हैं।
वे आठवीं कक्षा तक ही पढ़े और 10 फरवरी 1974 को हरियाणा शिक्षा विभाग में ड्राइवर नियुक्त हो गए। दिनांक 31 दिसंबर 2009 को वे सेवानिवृत्त हुए। स्वभाव से सामाजिक प्रवृत्ति होने के कारण वे शुरू से यूनियन में सक्रिय हो गए। उन्होंने चालक संघ के जरिए संगठन में 1978 में हिस्सा लेना शुरू किया था। वे चालक संघ के जिला प्रधान व कुछ समय के लिए राज्य उपप्रधान रहे। उनका अधिकतर समय जिले के भीतर ही काम करने के लिए समर्पित रहा। जब 1980 में सिरसा कर्मचारी संगठन का गठन किया गया तब भी सक्रिय लोगों में शामिल थे। उन्हें 1980 से 2010 तक उसके संगठन सचिव बने रहने का अवसर मिला।
उल्लेखनीय है कि राज्य व केन्द्र के सभी सरकारी और सार्वजनिक कर्मचारियों का यह मंच जनवादी आन्दोलन में विशेष स्थान रखता है। मई दिवस के ऐतिहासिक आयोजन अब भी इसी बैनर से किए जाते हैं। मेहता जी ने सर्वकर्मचारी संघ में भी अलग अलग पदों पर काम किया और सेवानिवृत्ति के पश्चात रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान भी रहे।
नौकरी में आने के बाद से वे संघर्षों में बढ़चढ़ कर भाग लेते रहे। सिरसा में हरियाणा सुबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन का भी हिस्सा रहे। सर्वकर्मचारी संघ का गठन होने के बाद तो जैसे आन्दोलन को पंख ही लग गए थे। वे अनेक बार जेल गए। वे दो बार डिसमिस हुए और समझौते के बाद बहाल हो गए।
किशोरीलाल को परिवार की ओर से सदैव सहयोग मिलता रहा। वे संगठन के कामों के बारे में घर पर बताते रहते थे। अनेक राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों से संपर्क रहा लेकिन कभी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल नहीं किया। वे सीधे स्वभाव के हैं। उनकी याद में कोई ऐसा कार्य नहीं है जिसके कभी बाद में बुरा लगा हो।
उनका मानना है कि संगठन के साथ साथ समाज हित के कामों में भी रुचि लेनी चाहिए। इससे आदमी की इज्ज़त बढ़ती है और समर्थन भी मिलता है। वे वर्तमान में कर्मचारियों के बीच एकता के अभाव को लेकर चिंतित हैं। इसके कारण लड़ाइयां कमजोर हो रही हैं। वे चाहते हैं कि एकजुट होकर संघर्ष करें।
किशोरीलाल का विवाह 12 फरवरी 1972 को सुश्री कमलेश देवी के साथ हुआ। उनके चार बच्चों में से तीन सरकारी सेवा में हैं और एक निजी कंपनी में काम करता है। फिलहाल परिवार सिरसा शहर की मीरपुर कालोनी में रहता है। (सौजन्य – ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक – सत्यपाल सिवाच
