जसवीर त्यागी की खाली-स्थान भरो और पांच अन्य कविताएं
खाली-स्थान भरो
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परीक्षा में प्रश्न पूछा गया
खाली स्थान भरिए
उसने खाली स्थान को
भरते हुए लिखा-
माँ-पिताजी।
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पोज़
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मेरी अधिकांश फोटो देखकर
उन्होंने कहा-
आपकी ज्यादातर फोटो
एक ही पोज़ की है
आपको पोज़ बदलना चाहिए
मैंने सहजता से कहा-
मुझे पोज़ बनाना नहीं आता।
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बच्चे का सामान
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अब बच्चा नहीं है
घर में उसका सामान यथावत है
बच्चे के खेल-खिलौने
पेन-पेंसिल,कॉपी-किताबें
साइकिल-फुटबाल
साँप-सीढ़ी,कैरम-बोर्ड
यहाँ तक की उसकी गुल्लक भी खामोश है
एक समय जब बच्चा था
उससे जुड़ा सामान
संसार की सबसे आनंददायी वस्तुएँ थीं
अब वे
सबसे पीड़ादायी चीज़ें हैं।
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दूर जाती आवाज़
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भूखा शेर
हिरण के पीछे दौड़ रहा है
कभी शेर
कभी हिरण आगे-पीछे होता है
दौड़ने की गति
धनुष से छूटे बाण-सी दिखती है
आखिर में
तीर ने छू लिया अपना निशाना
शिकार की गर्दन
शिकारी के कब्जे में है
हिरण के गले से
एक करुणार्द्र आवाज़ आ रही है
एकाग्र होकर सुनने पर पता चलता है
आवाज़ आ नहीं रही
आवाज़ जा रही है।
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लड़ाई
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युवावस्था में
लड़ाई जमाने से थी
उम्र बढ़ने पर
ज्यों-ज्यों समझ की सड़क
सख़्त होती गयी
त्यों-त्यों लड़ाई
आत्म केंद्रित होती चली गयी।
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एक समय
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एक समय बाद
सभी माँएँ
एक जैसी दिखती हैं
जैसे जन्म के बाद
सारे शिशु
एक-से लगते हैं।
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