हवा हवाई
शीतल पी सिंह
एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 679 हवाई मार्ग शुरू किए गए थे जिनमें से 165 बंद कर दिए गये ।
वजह जानिये !
नोएडा इंटरनेशनल से पहले 17 शहरों की उड़ानें थीं, अब 15 रह गईं । उड़ानों की संख्या 36 से घटकर 28-30 रह गई।
यूपी के कुशीनगर, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद… हवाई अड्डे लगभग बंद।
हिंडन पर उड़ानें आधी रह गईं।
जिस राज्य की प्रति व्यक्ति आय जहां राष्ट्रीय औसत के आधे के आसपास घूम रही है, वहां किसानों की जमीन अधिग्रहित करके, करोड़ों खर्च करके हवाई अड्डे बनाना और फिर उन्हें खाली छोड़ देना — क्या यही “विकास” है?
इन छोटे हवाई अड्डों पर पिछले 8 साल में राज्य और केंद्र मिलकर कितने करोड़ खर्च हुए? रखरखाव का खर्च अभी भी चल रहा है या बंद कर दिया गया?
जब मांग ही नहीं थी, तो बिना ठोस यात्री अनुमान के इन अड्डों को क्यों खोला गया? सिर्फ उद्घाटन की तस्वीरें खिंचवाने के लिए?
किसानों की उपजाऊ जमीन छीनकर बनाए गए ये अड्डे आज सन्नाटे में क्यों पड़े हैं? मुआवजे के तमाम विवाद अभी लंबित पड़े हुए हैं, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को क्या मिला?
शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण सड़कें और कृषि में पैसा लगाने की बजाय इन “खाली रनवे” पर खर्च करना गरीब राज्य के लिए जिम्मेदारी है या संसाधनों की बर्बादी?
जेवर जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी धूल फाँक रहे हैं तो इन छोटे अड्डों का नेटवर्क बनाने के पीछे असली मकसद कनेक्टिविटी था या चुनावी शो?
जब राज्य की आम जनता अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हो, तब खाली हवाई अड्डे बनाना विकास है?
