समाज की विसंगतियों को बेनकाब करतीं कहानियां

पुस्तक समीक्षा

समाज की विसंगतियों को बेनकाब करतीं कहानियां

हरदीप सबरवाल के कहानी संग्रह लाल स्याही पर जयपाल की टिप्पणी

पटियाला (पंजाब )निवासी हरदीप सबरवाल उभरते हुए प्रतिभावान कहानीकार हैं । उनका नवीनतम कहानी संग्रह ‘लाल स्याही’  बोधि प्रकाशन से प्रकाशित (2026) हुआ है। आज के दौर की कविता और कहानी लेखन में वे एक चर्चित नाम है ।आलोच्य कहानी संग्रह में कुल 15 कहानियाँ हैं। इन कहानियों को पढ़कर पता चलता है कि हरदीप सबरवाल एक संवेदनशील सूक्ष्म-दृष्टि संपन्न सजग रचनाकार हैं । वे बड़े-बड़े मसलों को अपनी कहानियों का विषय नहीं बनाते बल्कि जिंदगी के छोटे-छोटे सन्दर्भों से जीवन  के बड़े-बड़े सत्य खोज लेते हैं और पाठक को भी उन सत्यों का साक्षात्कार करा देते हैं । इन कहानियों का कथानक भावपूर्ण होते हुए भी उनमें कहीं भी भावनाओं का अतिरेक दिखाई नहीं देता। इन कहानियों में न तो बड़बोलापन है और न ही आदेश या उपदेश । यह इन कहानियों की खूबी है। एक बेहतर समाज की परिकल्पना के साथ हरदीप सबरवाल अपने रचनाकर्म में संलग्न हैं । उनकी कहानियाँ भारतीय समाज में फैली हुई विसंगतियो को न केवल बेनकाब करती है बल्कि एक सम्मानजनक बेहतर समाज की परिकल्पना भी करती हैं ।
उनकी पहली कहानी  चुटकुला* है।यह कहानी पाठयक्रम समितियों, शिक्षा प्रणाली और शिक्षकों की संवेदनहीनता को उजागर करती है कि वे कविताओं, कहानियों और नाटकों को बिना किसी संवेदनशील समझ के बच्चों पर थोप देते हैं और बालमन की कोमलता का ध्यान ही नहीं रखते जैसे इस कहानी में दी गई एक बाल-कविता का अंश देखिए—
मोटा सेठ सड़क पर लेट 
आई गाड़ी फ़ट गया पेट
इस कविता के दर्दनाक दृश्य का बच्चे के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है ; यह जाने बिना ही शिक्षक इस तरह की तुकबन्दी को रटवाते रहते हैं। एक अन्य बाल- कविता का अंश देखिए–
तितली उड़ी बस में चढ़ी
सीट ना मिली रोने लगी 
ड्राइवर कहता आजा मेरे पास 
तितली बोली हट बदमाश
इस कविता में बालमन की संवेदना का ध्यान नहीं रखा गया। यह एक प्रकार की क्रूरता है। यह संवेदनहीनता बहुत  बार अध्यापकों के व्यवहार में भी आसानी से देखी जा सकती है। पूर्वोक्त दोनों बाल कविताओं में मोटे सेठ और ड्राइवर की नकारात्मक छवि बालमन पर थोप दी गई है ।
इसी तरह ‘लाल स्याही’ कहानी भी आज के दौर की शिक्षा व्यवस्था के तहत स्थापित प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों के शोषण पर तीखा प्रहार करती है। निजी स्कूलों की व्यवस्था कुछ इस तरह से बनाई गई है कि कोई भी शिक्षक इससे बाहर नहीं आ पाता। न्यूनतम वेतन के बावजूद भी वह इसी व्यवस्था का ही एक पुर्जा बन कर रह जाता है।
ठंडे हाथ*
इस संग्रह की  महत्वपूर्ण और चर्चित कहानी है जो एक बुत्ततराश और लेखक के संवाद के माध्यम से बुत्ततराश की अवसरवादी मानसिकता और बड़बोलेपन पर तंज कसती है लेकिन एक लेखक की गंभीरता और कम बोलने को विशेष गुण मानती है। कहानी के अंत में कहानीकार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहता है-‘ बुत्ततराश को लगा कि लेखक के अंदर कुछ मर गया है लेकिन वो ये ना समझ सका कि लेखक उस मरे हुए को अपने अंदर जिंदा रखना चाहता है।’
प्रश्नचिन्ह* 
कहानी वर्तमान दौर की साम्प्रदायिक राजनीति को दंगों के एक कातिल-कैदी के माध्यम से  बेनकाब करती है कि कि कैसे उसने साम्प्रदायिक उन्माद का शिकार होकर एक बेकसूर बाप के बेकसूर बेटे की हत्या कर दी थी। वह पश्चात्ताप करना चाहता है लेकिन अब तो जो होना था हो गया..अब किसी का बेटा तो वापिस नहीं आ सकता। मारे गए बेटे से उस कैदी की बातचीत आज के राजनीतिक सिस्टम की पोल खोल कर रख देती है। इस कथानक पर एक लघु नाटिका भी रची जा सकती है।
एक और मोहित*
युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर, नंगा आदमी*  फ़ेसबुकिया प्रेम और आदमी के दोहरे चरित्र पर केंद्रित कहानियां हैं l एक इच्छा की मौत*  हाशिये के उन अभागे लोगों की बात करती है जिनकी इच्छायें आम तौर पर मर जाती हैं लेकिन राजनीति इन्हीं इच्छाओं का दोहन करके जिंदा रहती है।
पुस्तक की–गीले हाथ, वर्जित, वे उसे कामरेड बना कर छोड़ेंगे, इलायची,एक हठयोग की बांह, राह चलते,बिना चांद की रात आदि कहानियां भी मनुष्य की गरिमा और उसकी खूबसूरती को पाठकों के सामने लाने का काम बखूबी करती हैं। इसके साथ-साथ मनुष्य के दोहरे चरित्र और क्रूरता को नंगा करने का काम भी करती हैं l अपने समय के सवालों से टकराती हुई ये कहानियां व्यवस्था-परिवर्तन का सीधा आह्वान करती हुई इस व्यवस्था को मानवीय बनाना चाहती हैं ताकि एक बेहतर और खूबसूरत समाज की रचना हो सके। अधिकांश कहानियां आकार मे  छोटी, रोचक  और पठनीय हैं। रचनाकार की भाषा आधुनिक भावबोध से परिपुष्ट है और पात्रों की मानसिक स्थिति के अनुरूप है। संवाद-शैली कहानियों को आत्मीय बनाने में सफल रही है।
कहानीकार हरदीप सबरवाल को बहुत बधाई!
पुस्तक- लाल स्याही (कहानी संग्रह)-2026
लेखक- हरदीप सबरवाल (8437278289)
कीमत-246/- पेपर बैक 
प्रकाशक-बोधि प्रकाशन-जयपुर ।

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