कविता
तानाशाह का नौजवानों के नाम संदेश
जयपाल
हे भटके हुए नौजवानों !
तुम राष्ट्र को प्यार क्यों नहीं करते..?
जब गाया जा रहा हो राष्ट्र का गीत
तुम सोच रहे होते हो राष्ट्र की हिंसा के खिलाफ़
जब विजय पताका फहराई जा रही होती है देश में
तुम बच्चों के मारे जाने पर शोक प्रकट कर रहे होते हो
जब देश की बात हो रही होती है
तुम सारी दुनिया की बात करने लगते हो
जब युद्ध के पक्ष में खड़ा होना होता है
तुम बुद्ध के पक्ष में खड़े हो जाते हो
जब हम शांति की बात करते हैं
तुम क्रांति की बात करने लगते हो
आखिर तुम लोग किस मिट्टी के बने हो
जब सब कुछ मटियामेट करना होता है
तुम मिट्टी को बचाने में लग जाते हो !
