बनाना लीफ का खास “इडली प्लाटर”

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संजय श्रीवास्तव के बारे में कई बार लिख चुका हूं। अब लिखना बेमानी लगता है। वह जिस तरह से भाषा को लालित्य देते हुए किसी भी चीज की व्याख्या करते हैं, वह बहुत ही चमत्कारी होता है। यह ‘चमत्कार’ उनकी किताबों में भी देखा जा सकता है। पिछले दिनों वह गोवा घूमने गए थे। अपनी गोवा यात्रा पर उन्होंने लिखा है। प्रतिबिम्ब मीडिया में उनकी शुरुआती तीन कड़ियां प्रकाशित हुई थीं। अब संजय जी के जरिये आप लोग गोवा की तमाम खासियतों के बारे में जानिये।संपादक

गोवा डायरी 2026(4)

बनाना लीफ का खास “इडली प्लाटर”

संजय श्रीवास्तव

तीसरे दिन की यात्रा के बाद चौथे दिन का हाल बताने से पहले खाने की एक यात्रा का जिक्र जरूर करना चाहूंगा। वजह है कैंडोलिम के बनाना लीफ रेस्टोरेंट में चखी गई दो ऐसी डिश, जिनका स्वाद अभी तक जीभ पर बना हुआ है।
इनमें एक है उनका खास मसाला डोसा, जिसकी तारीफ मैंने दिल्ली से गोवा जाते समय राजधानी एक्सप्रेस में अपनी एक सहयात्री से सुनी थी। मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि शायद ऐसा मसाला डोसा आपको किसी दूसरे रेस्टोरेंट में न मिले। ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि उत्तर से लेकर दक्षिण तक तमाम शहरों में मैंने बहुत से रेस्टोरेंट और जगहों पर मसाला डोसा चखा है, लेकिन इतना स्वादिष्ट शायद ही कहीं मिला हो। उसका राज मैं बाद में खोलूंगा। पहले उस डिश की बात, जिसने जीभ को बाग-बाग कर दिया।

गोवा की डिस- बनाना लीफ से तैयार इडली प्लाटर।

इस स्वादिष्ट डिश का नाम है इडली प्लाटर।

हां। चाइनीज प्लाटर, तंदूरी प्लाटर, साउथ इंडियन प्लाटर का स्वाद तो आपने जरूर आजमाया होगा, लेकिन इडली प्लाटर शायद बनाना लीफ की खास और अनूठी पेशकश है। इसमें कई तरह की इडलियां अलग-अलग चटनी और मनभावन जायके वाले पेस्ट के साथ परोसी जाती हैं। जहां-जहां बनाना लीफ रेस्टोरेंट हैं, वहां यह एक दिलचस्प आइडिया और स्वाद का अलग अनुभव है।
इस डिश में वैरायटी और फ्लेवर का अच्छा बैलेंस है। प्लाटर में पालक इडली, कांचीपुरम इडली, मिनी इडली, तड़का वघारेला पोरियाल इडली और मसाला इडली एक साथ परोसी जाती हैं। हर इडली की एक बाइट में अलग स्वाद मिलता है।
और अगर इनका स्वाद सोने जैसा है तो साथ परोसे गए दो अलग फ्लेवर के पेस्ट सोने पर सुहागा हैं। इन्हें कच्चे नारियल को कद्दूकस करके टमाटर और पुदीने के फ्लेवर में तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि ये पेस्ट तुरंत तैयार किए जाते हैं। इसलिए उनका ताजा टेक्सचर जीभ पर आते ही स्वाद में एक अलग खनक और ट्विस्ट पैदा करता है।
इन इडलियों को गनपाउडर, करी पत्ता और सरसों के तड़के के साथ भी टॉस किया जाता है। साथ में गरमा-गरम सांभर इस पूरे स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। स्वाद के प्रेमियों को इसे जरूर ट्राई करना चाहिए। इसे खाने के बाद यकीनन आप तृप्त महसूस करेंगे।
वैसे जब बात इडली की चली है तो नोएडा के सेक्टर-29 के लक्ष्मी कॉफी हाउस की फ्राइड इडली का जिक्र भी जरूरी है। वहां इडली को काटकर सुनहरा होने तक डीप फ्राई किया जाता है और फिर उसे मसालेदार ग्रेवी के साथ मिलाकर सर्व किया जाता है। यह वहां मंगलवार और शुक्रवार को ही मिलती है।
मैं पिछले 23 साल से ब्रह्मपुत्र कॉम्प्लेक्स के लक्ष्मी कॉफी हाउस जा रहा हूं। सस्ता भी है और स्वादपूर्ण भी। यानी इडली की अपनी एक अलग यात्रा है—गोवा से नोएडा तक।
अब बात उसी बनाना लीफ के मसाला डोसा की, जिसके अंदर की फिलिंग इसे बाकी मसाला डोसों से अलग बनाती है और जिसकी हर बाइट जीभ को मस्ती से भर देती है।
इस मसाला डोसे की फिलिंग साधारण आलू मसाले से काफी अलग, रिच और क्रीमी है। आलू मसाला तैयार करते समय अमूल बटर का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है। गर्म डोसे के अंदर जब चीज और बटर आलू मसाले के साथ पूरी तरह पिघल जाते हैं तो स्वाद बहुत स्मूथ और रिच हो जाता है।
फिर यह भी समझ में आया कि आलू को बहुत बारीक और क्रीमी फॉर्म में मैश किया जाता है। उसमें जब मक्खन मिलता है तो आलू का सूखापन बिल्कुल खत्म हो जाता है। यही वजह है कि हर बाइट में एक जैसा क्रीमी स्वाद आता है।
यानी मसाला डोसा वही, आलू वही, लेकिन बनाने का तरीका थोड़ा अलग और नतीजा बिल्कुल अलग। और शायद यही अच्छे खाने की असली खूबी है—सामान वही हो सकते हैं, लेकिन हाथ और तरीका स्वाद बदल देते हैं। तो मौका लगे तो आप भी इन उम्दा स्वाद पर हाथ जरूर आजमाएं …मजा आ जाएगा. (गोवा यात्रा का हाल जारी रहेगा)

संजय श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से साभार

https://pratibimbmedia.com/the-village-of-g…y-an-iconic-road/ ‎

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