करनाल में अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विषय पर सेमिनार का आयोजन
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बच्चों में शुरू से तर्कशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरतः अरुण कैहरबा
तर्कशील सोसायटी करनाल इकाई का गठन, रंजन प्रधान बने

करनाल। रेशनलिस्ट (तर्कशील) सोसायटी हरियाणा की द्विमासिक मीटिंग एवं “अंधविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण” विषय पर सेमिनार का आयोजन रविवार 16 अगस्तन को रोड़ भवन करनाल में किया गया। बैठक और सेमिनार में विभिन्न इकाइयों के 50 सदस्यों की भागीदारी रही। बैठक की अध्यक्षता मास्टर बलजीत सिंह एवं संचालन राजेश बिन्द्रा ने किया।
मुख्य वक्ता हिंदी प्राध्यापक एवं लेखक अरुण कैहरबा ने अंधविश्वास बनाम वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर अपने वक्तव्य में हर घटना को कार्य-कारण संबंध की कसौटी पर परखने एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विवेक से स्वीकार करने तथा निर्णय लेने के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने तर्कशील चिंतन को बच्चों के शुरुआती वर्षों में विकसित करने की एंव शिक्षक वर्ग में वैज्ञानिक दृष्टिकोण होने की आवश्यकता पर बल दिया।

हिंदी लेखक प्रो. अशोक भाटिया ने अंधविश्वासों और पाखंडों के संस्थागत होने पर चिंता प्रकट की । उन्होंने विभिन्न उदाहरणों द्वारा बताया कि कैसे कोरी कल्पित कहानियों से अंधविश्वास फैलता है। उन्होंने कहा कि हमें हर बात को तर्क की कसौटी पर परखना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर लिखी अपनी किताब “अंधविश्वास रोग और ईलाज” का भी जिक्र किया ।
हरियाणा में सांपों को लेकर बिना कोई हानि पहुंचाए पकड़ने एवं सांपों के बारे में फैले भ्रम का निवारण करने वाले तर्कशील साथी,जिन्हें स्नेकमैन के नाम जाना जाता है, सतीश फफड़ाना ने साँपों से बचाव एवं काटने के उपरांत इलाज के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी ।
बलबीर सिंह एडवोकेट ने समाज में फैले अंधविश्वास को सिर्फ अनपढ़ नहीं अपितु पढ़े लिखे में भी होने का जिक्र करते हुए एक डॉक्टर दंपति का उदाहरण दिया जिन्होंने अंधविश्वास के चलते अपने दोनों बेटों की जान गंवा दी थी
इस चर्चा में ईश्वर सफीदों, अनुपम सिंह, राजेश राजौंद,पलविंदर ने भी विचार व्यक्त किए। अपने अध्यक्षीय भाषण में मास्टर बलजीत सिंह ने संस्था को अकादमिक एवं सांगठनिक रूप से मजबूत करने पर बल दिया।
इस अवसर पर जिला करनाल की इकाई का गठन भी किया गया, जिसमें डॉ. रंजन को प्रधान, साधु राम को उप प्रधान, ऋषिपाल को सचिव, प्रमोद कुमार को कोषाध्यक्ष, जयदेव को प्रचार सचिव चुना गया।
अजय आशु व रेयांश कुंडू ने पुस्तक प्रदर्शनी लगाई जिसमें सदस्यों ने काफी रुचि दिखाई।
अगली जनरल मीटिंग एवं सेमिनार 18 अक्तूबर को जींद में आयोजित करने की सहमति बनी।
