किसानों मजदूरों और जनता की मांगों को स्वीकार कर उनका तुरंत समाधान करो
जनवादी लेखक संघ मेरठ ने केंद्र और यूपी सरकार से किसानों मजदूरों और जनता की मांगों को स्वीकार कर उनका तुरंत समाधान करने की मांग की है। जलेस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आज भारत के अधिकांश राज्यों में अपनी जायज मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन शुरू हो गया है। इस आंदोलन में जन समस्याओं को लेकर पूरे देश में धरने और प्रदर्शन जारी हैं जिनमें करोड़ों किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, महिलाएं और बुद्धिजीवी शामिल हैं। यह बेहद अफसोस की बात है कि किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं की समस्याओं का, सरकार जान पूछ कर समाधान नहीं कर रही है और जनता को जुमलेबाजी करके गुमराह कर रही है।
जलेस मेरठ के सचिव मुनेश त्यागी और सहसचिव मंगल सिंह मंगल ने कहा कि किसान अपनी फसलों का वाजिब दाम न मिलने पर परेशान हैं। मजदूरों को न्यूनतम वेतन न मिलने और मजदूरों की गुलामी के चार कानून को लेकर परेशान हैं। छात्र परीक्षाओं की असफलता को लेकर परेशान हैं। नौजवानों को समय से रोजगार नहीं मिल रहा है। महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की आंधी नहीं रुक रही है। वादकारियों को समय से सस्ता और सुलभ न्याय नहीं मिल रहा है। न्यायालय में न्यायाधीशों और कर्मचारियों की भारी कमी है। उत्तर प्रदेश के 26 श्रम न्यायालय में से 17 श्रम न्यायालय में पिछले कई सालों से पीठासीन अधिकारी नहीं है जिस कारण मजदूर और वादकारियों को लगातार अन्याय का सामना करना पड़ रहा है।
जनवादी लेखक संघ मेरठ किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों, महिलाओं की इन सब समस्याओं को अविलंब दूर करने के देशव्यापी आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती है और सरकार से मांग करती है कि छात्रों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं और न्याय की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए।
जनवादी लेखक संघ मेरठ मांग करती है…
1.मुक्त व्यापार समझौता रद्द करो,
2.एमएसपी गारंटी कानून लागू करो,
3.बीज विधेयक रद्द करो,
4.मजदूर विरोधी चारों काले कानून रद्द करो,
5.मजदूरों को प्रतिमाह 26000 वेतन दिया जाए,
6.किसानों को फसलों का वाजिब दाम दिया जाए,
7.किसान मजदूर विरोधी समस्त नीतियां वापस ली जाएं,
8.शिक्षा का निजीकरण, सांप्रदायिकीकरण एवं अविवेकीकरण बंद किया जाए,
9.सबको आधुनिक और मुफ्त शिक्षा का इंतजाम किया जाए,
10.सबको समय से रोजगार देना अनिवार्य किया जाए,
11.स्वास्थ्य और शिक्षा की धंधेबाजी बंद की जाए,
12.सबको तुरंत मुफ्त इलाज की व्यवस्था की जाए,
13.जनता को तुरंत सस्ता और सुलभ न्याय दिया जाए,
14….5 करोड़ 52 लाख लंबित मुकदमों में वादकारियों को तुरंत न्याय दिया जाए,
15.यूपी के 17 श्रम न्यायालयों में वर्षों से खाली पड़े पदों पर पीठासीन अधिकारियों की नियुक्तियां तुरंत की जाएं,
16.मुकदमों के अनुपात में न्यायाधीश और कर्मचारी तुरंत नियुक्त किए जाएं।
