HomeBlogराजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी राजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी 7 July 2026Pratibimb Media कविता जी रामजी राजकुमार कुम्भज की वंदे मातरम् वंदे माताराम वंदे भ्राताराम वंदे तोताराम वंदे छोटाराम वंदे मोटाराम भारतमाता की जै राजमाता की जै संपत्तिराय की जै चंपतराय की जै और ये रामजी किधर है भाया? नहीं मालूम,मैं तो बैंकाक गया था जी रामजी! ————- Post Views: 252 Like 0 0 Comments
‘इंडिया’ के सत्ता में आने पर एमएसपी को कानूनी गारंटी मिलेगी: राहुल गांधी रोहतास/सासाराम। कांग्रेस ‘इंडिया’ के सत्ता में आने पर एमएसपी को कानूनी गारंटी मिलेगी: राहुल गांधी राहुल गांधी ने शुक्रवार को…
जय संविधान के नारे से इतनी नफरत क्यों ? मुनेश त्यागी पिछले दिनों जब संसद में “जय संविधान” के नारों पर आपत्तियां उठायीं गईं और लोकसभा स्पीकर द्वारा…
मोना के सहारे ब्राह्मण, मसूद के सहारे मुस्लिम—कांग्रेस का यूपी प्लान क्या है? यूपी राजनीति मोना के सहारे ब्राह्मण, मसूद के सहारे मुस्लिम—कांग्रेस का यूपी प्लान क्या है? ओमप्रकाश तिवारी उत्तर प्रदेश…