सम्मान के साथ बुढ़ापा

कल विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस था। आज बुजुर्गों को लेकर एक कविता दिखी। बहुत मार्मिक कविता है। आप लोग भी पढ़िए- 

विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस

सम्मान के साथ बुढ़ापा

सतविंद्र कौर

बुढ़ापा कमजोरी नहीं होता,
यह अनुभव की सुंदर शान होता है।
सफेद बाल केवल उम्र नहीं बताते,
यह जीवन की लंबी पहचान होते हैं।

चेहरे की झुर्रियाँ मिटने वाली रेखाएँ नहीं,
ये समय द्वारा लिखी कहानियाँ हैं।
हर रेखा में धैर्य और बलिदान,
अनगिनत संघर्षों की निशानियाँ हैं।

हमारे बुजुर्गों ने राह बनाई,
प्यार, संस्कार और मूल्य सिखाए।
अपने सुख त्यागकर हमें संवारा,
हर कठिन समय में हौसले से निभाया।

कोई भी बुजुर्ग अनदेखा न रहे,
न कोई ताना, न दिल पर घाव रहे।
उन्हें चाहिए प्यार और सहारा,
न अकेलापन, न दर्द का गुज़ारा।

जब मौसम भी रंग बदलता जाए,
गर्मी, बाढ़ या तूफान आए,
आओ सुनिश्चित करें हर बुजुर्ग की सुरक्षा,
मिले उन्हें सम्मान, सेवा और रक्षा।

मज़बूत वह समाज नहीं,
जिसके पास केवल धन या शक्ति हो।
मज़बूत वह समाज है,
जहाँ बुजुर्गों के लिए सम्मान और प्रेम हो।

संदेश:

आओ आज और हर दिन यह प्रण करें—
बुजुर्गों के साथ हर प्रकार के दुर्व्यवहार को “ना” कहें।
हर वरिष्ठ नागरिक को सम्मान, सुरक्षा, सेवा और आत्मसम्मान दें,
क्योंकि बुढ़ापा डर नहीं,
सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *