राजेश भारती की छह कविताएं

राजेश भारती की छह कविताएं

 

1.

जिंद़गी

 

ज़िंदगी

मेरे खेत में

लहलहाती गेहूंँ की बालियों

पर लगा कीट

 

ज़िंदगी

मेरे पशु बाड़े में

बैठा बूढ़ा बैल

जो निरंतर ताक रहा है

 

ज़िंदगी

मेरे छोटे बच्चे

के हाथ में

फड़फड़ाती तितली

जो उड़ने को बेताब

 

ज़िंदगी

मेरे मजदूर बाप के

सिर पर रखा

पत्थरों का टोकरा

 

ज़िंदगी

मेरी माँ के

दुपट्टे से बंधा

अठ्ठन्नियों का वो गुच्छा

जो अब चलन में नही

 

ज़िंदगी

जिसे नौंचने को

मंडरा रहे हैं गिद्ध

ऐसी परकटी चिड़िया

 

ज़िंदगी

एक उदास गीत

जिसे एक प्रेयसी

गुनगुना रही है

अपने प्रियतम की विरह वेदना में

 

ज़िंदगी

एक विश्वविद्यालय

जिसमें सीखते हैं हम

प्रेम की परिभाषा।

 

 

2

इसी समय ही

 

इसी समय ही

कुछ मजबूर

औरतें कर रही होंगी

विवश होकर

अपनी देह का सौदा

इसी समय ही

कुछ अभागे बच्चे

बेच रहे होंगे ग़ुब्बारे

सड़क के किनारे

और इसी समय ही

शिक्षा के बजट को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया होगा और सांसदों के वेतन भत्तों में चौगुनी वृद्धि हो गई होगी

 

इसी समय ही

मेरी आत्महत्या की ख़बरें फैलाई जा रही होंगी

लेकिन मुझे मारा गया है

मैंने मानवता पर कविताएं लिखीं

मैंने प्रेम पर कविताएं लिखीं मैंने तितलियों पर कविताएं लिखॆ

लेकिन मेरा क़त्ल इसलिए किया गया

कि मैंने इंक़लाब के लिए कविताएं लिखीं

 

इसी समय ही

एक आदमी जो एक ख़ूबसूरत दुनिया का स्वप्न देख रहा होगा

ऐसी दुनिया

जहां शांति के झरने बह रहे होंगे

अफ़्सोस वह आदमी इसी समय एक बम हमले में मारा जा चुका होगा

 

इसी समय ही

कुछ सिरफिरे लोग

भर रहे होंगे बंदूकों में गोलियाँ

और कुछ बच्चे दे रहे होंगे पौधों को पानी

 

इसी समय ही

सारी दुनिया सहमी होगी युद्ध के साए में

और इसी समय ही एक प्रेमी अपनी प्रेयसी के बालों में फूल टाँक रहा होगा

और इसी समय ही

एक बच्चा अपनी मांँ की गोद में सबसे सुरक्षित होगा।

ईश्वर सबका भला करें

 

इसी समय ही

एक मुस्कुराते हुए बच्चे की निश्चल मुस्कान में ढूंढ लिया होगा

किसी ने मुस्कुराता हुआ ईश्वर

और इसी समय ही कोई सिरफिरा, बनकर मानव बम बैठने जा रहा होगा

बच्चों से भरी स्कूल बस में जन्नत पाने के लिए

 

इसी समय ही

कुछ बच्चे

जो बिलबिला रहे होंगे भूख से

बीमार लाचार समाने को होंगे

मृत्यु की गोद में

कौन पढ़ पाएगा उनकी

भूख में सूखी अंतड़ियों का सुसाइड नोट

 

और इसी समय ही कुछ कुत्ते बैठे सोफों पर खा रहे होंगे ब्रांडेड फूड

और कर रहे होंगे

गोश्त दिए जाने की प्रतीक्षा

 

इसी समय ही

बकरियों का मिमियाना क़साई के आने की सूचना देता है

और इसी समय ही

एक सुनसान रास्ते पर एक लड़की की लाश मिली होगी बताने वाले बताते होंगे

यह वही लड़की है जिसने पिछले महीने घर से भाग कर शादी की थी

 

इसी समय ही

एक माँ अपनी बच्ची को सुना रही होगी

युद्ध की कहानी

युद्ध जो लड़ा गया

ज़मीन की ख़ातिर

संपूर्ण विश्व पर अपना आधिपत्य स्थापित करने की लालसा लिए

युद्ध जो लड़ा गया सोना- चांदी, तेल के भंडारों को लूटने के लिए

औरतें भी नहीं बच पाई लुटने से

किंतु अफ़सोस

कोई एक भी युद्ध

क्यों नहीं लड़ा गया

प्रेम के लिए।

 

3

नज्म – स्वयं से संवाद

 

नहीं किसी से

अब उम्मीदें

नहीं किसी पर

गुस्सा आए

 

रोना धोना

लगा रहेगा

आना जाना

लगा रहेगा

कौन बचेगा

उसका बंदा

उस का मतलब

रब का बंदा

 

अब करनी हैं

खुद से बातें

किसके बारे

अपने बारे

अपने मतलब

जिस से सब हैं

और ये दुनिया

जाने भी दो

और वो लड़की

क्या हुई किसी की ?

और ये दौलत

सब मिट्टी है

कोठी बंगले

ढह जाएंगे

रिश्ते नाते

सब झूठे हैं

तो सत्य क्या है

नाम खुदा का

और मित्र प्यारे

सब मतलब के

प्यार यहाँ पर

नहीं बराबर

और नफरतें

झोली भर – भर।

————

4

माँ

 

माँ कर लेती है

पिता के क्रोध का सामना

छुपा लेती है अपने आंसूओं को

हंसी की ओट में

कोई समझ नहीं पाता

उसकी खामोशियों में

उठा तूफान ।

 

5

समय

 

समय

काट रहा है मुझे

मैं भी

समय को काट रहा हूँ

दोनों खून से लथपथ हैं।

 

6

तवा

 

तवा सबसे पुराना साथी है

रसोई का

वह देखता है

कैसे हाथ बदलते हैं

कैसे स्वाद बदलते हैं

कैसे भूख बदलती है

 

वह कभी शिकायत नहीं करता

केवल गरम होता है

और देता है

वही पुरानी गोलाकार रोटी

जिसमें जीवन का सारा दर्शन छिपा है

दोनों तरफ से पककर

मध्य में नरम रहकर।

 

कवि परिचय

राजेश भारती

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित युवा साहित्यकार

आठ किताबें प्रकाशित

विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित

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