जयपाल की दो लघु कविताएं

 

कविता

अचानक

      जयपाल

 

आदमी या घर

अचानक नहीं टूटता

 

नदी, तालाब ,पेड़

अचानक नहीं सूखते

 

सूरज, चांद, सितारे भी

अचानक नहीं डूब जाते

 

फिर क्यों मर जाती है अचानक

मनुष्य की आत्मा

 

2

 विस्थापित बहनें

 

बहनें विस्थापित कर दी गईं

कहा गया उनकी शादी हो गई है

विस्थापन का दर्द दिल में दबाये

उन्होंने बसाए घर-परिवार

गांव-नगर-बस्तियां

ताकि विस्थापित न रहे कोई दुनिया में

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